इंदौर में चल रहे न्यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (एनएसआईकॉन 2025) के राष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया के मस्तिष्क पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों पर चेतावनी दी। दैनिक भास्कर ने न्यूरोलॉजिस्ट से पूछा कि टीनएज-युवा 7-8 घंटे और वयस्क 4-5 घंटे सोशल मीडिया पर बिता रहे हैं, इसका ब्रेन पर क्या असर पड़ रहा है।
सोशल मीडिया से दिमाग पर प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी देर तक फोन पर रहने से ब्रेन की केमिस्ट्री बदल रही है, जिससे याददाश्त में कमी, फोकस की समस्या, तनाव और चिंता बढ़ती है।
4 बड़े असर:
- डोपामिन की लत: हर लाइक, कमेंट या नोटिफिकेशन से दिमाग में ‘डोपामिन’ निकलता है, जो खुशी का हार्मोन है। लगातार उपयोग से छोटी खुशी की लत लगती है, जो मानसिक नशे जैसा व्यवहार पैदा करती है।
- निर्णय लेने और याददाश्त में कमी: प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स क्षेत्र प्रभावित होता है। इसका असर निर्णय लेने और स्मरण क्षमता पर पड़ता है।
- तनाव, चिंता और आत्मसम्मान में कमी: लगातार स्क्रोलिंग से तनाव और अवसाद बढ़ता है। ‘लाइक’ और डोपामिन के प्रभाव से मानसिक असंतुलन देखने को मिलता है।
- नींद और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर: देर रात तक फोन इस्तेमाल करने से ब्लू-लाइट के कारण मेलाटोनिन हार्मोन में कमी आती है, जिससे नींद प्रभावित होती है।

दिमाग को सुरक्षित रखने के उपाय
40-मिनट रूल: सोशल मीडिया को लगातार 40 मिनट से ज्यादा न देखें, हर 40 मिनट बाद 10 मिनट फोन को दूर रखें।
नो-नोटिफिकेशन जोन: रात 10 बजे के बाद फोन साइलेंट मोड में रखें।
एक घंटा-एक काम: एक समय में केवल एक ही काम करें, फोन को टेबल से दूर रखें।
अतिरिक्त सुझाव:
- दिन में 2 घंटे या उससे कम सोशल मीडिया उपयोग।
- सप्ताह में 1 दिन डिजिटल डिटॉक्स लें।
- लक्ष्य तय करके सोशल मीडिया का उपयोग करें।
- शाम के बाद ब्लू-लाइट फिल्टर चालू रखें।
एक्सपर्ट पैनल: डॉ. मानस पाणिग्रही (प्रेसीडेंट, एनएसआई), डॉ. डेनियल जे. होह (पूर्व प्रेसीडेंट, CNS-यूएसए), टेस्टिनो आर. मेलिग (प्रेसीडेंट, ईएएनएस, डेनमार्क), डॉ. अर्चना वर्मा (एनएसआई, इंदौर) ने सोशल मीडिया के दिमाग पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
निष्कर्ष: विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया का सीमित और नियंत्रित उपयोग ही दिमाग और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है।