“हनुमान जी की अपार कृपा से सजा सीहोरा! 40 साल से चली आ रही परंपरा ने फिर बांधा भक्तों का मन”

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सागर जिले के ग्राम सीहोरा में आज हनुमान जयंती का उत्साह देखते ही बनता था। सुबह से ही गांव के मंदिरों से घंटियों और भजनों की मधुर ध्वनि गूंजने लगी, और देखते ही देखते पूरा सीहोरा भक्तिमय रंग में सराबोर हो गया। हर साल की तरह इस बार भी हनुमान जी के भक्तों ने इस पर्व को अद्भुत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया।

भक्ति की लहर, उमड़ा जनसैलाब

सुबह के पहले प्रहर से ही गांव के हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं की कतारें लगनी शुरू हो गईं। बच्चे, बूढ़े, युवा सभी हाथों में फूल, नारियल और प्रसाद लिए हनुमान जी के दर्शनों को आतुर थे। मंदिर के पुजारी ने विधिवत पूजन-अर्चन किया और भक्तों ने हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए बजरंगबली का आशीर्वाद मांगा।

शोभायात्रा ने बांधा समां

दोपहर बाद तो उत्सव ने और भी रंग पकड़ा जब गांव की गलियों से भव्य शोभायात्रा निकली। बैंड-बाजों की थाप पर नाचते-गाते भक्तों का जुलूस देखकर ऐसा लग रहा था मानो स्वयं हनुमान जी धरती पर उतर आए हों। राम-भक्त हनुमान, श्रीराम-सीता और राधा-कृष्ण की सजीव झांकियों ने लोगों के मन को भावविभोर कर दिया। कुछ झांकियों में हनुमान जी के बाल रूप की मनमोहक छवि थी, तो कुछ में संकट मोचन का वीर रूप। गांव के युवाओं ने इन झांकियों को इतनी खूबसूरती से सजाया था कि लोग देखते ही रह गए।

अखाड़ों की धमाकेदार प्रस्तुतियाँ

शाम ढलते-ढलते मैदान में अखाड़ों के जवानों ने अपने शक्ति प्रदर्शन और मल्लयुद्ध के करतबों से सबका मन मोह लिया। लाठी चलाने की फुर्ती, कुश्ती के दांव-पेच और शारीरिक क्षमता के अद्भुत नज़ारों ने दर्शकों को तालियाँ बजाने पर मजबूर कर दिया। बुजुर्गों ने कहा – “यही तो हमारी संस्कृति है, जो पीढ़ियों से चली आ रही है।”

40 साल से अटूट विश्वास की डोर

आयोजन समिति के वरिष्ठ सदस्य श्री रामकिशोर जी ने बताया – “हमारे पिताजी और दादाजी के ज़माने से यह परंपरा चली आ रही है। हर साल हनुमान जयंती पर गांव एक परिवार की तरह इकट्ठा होता है।” उन्होंने बताया कि इस आयोजन के पीछे सैकड़ों लोगों की मेहनत और श्रद्धा छुपी है। युवाओं ने रात-रात भर जागकर झांकियाँ तैयार कीं, महिलाओं ने प्रसाद बनाया और स्थानीय दुकानदारों ने स्वेच्छा से सहयोग दिया।

सुरक्षा और सफाई का रहा विशेष ध्यान

इस बार आयोजन में पुलिस प्रशासन ने भी पूरा सहयोग दिया। यातायात व्यवस्था से लेकर भीड़ प्रबंधन तक सभी कुछ सुचारू रूप से संचालित हुआ। स्थानीय युवाओं ने स्वयंसेवक के रूप में काम करते हुए गांव की सफाई का भी पूरा ध्यान रखा, ताकि उत्सव के बाद भी सीहोरा साफ-सुथरा और खूबसूरत बना रहे।

समापन पर आत्मीयता का अनुभव

रात को भंडारे का आयोजन हुआ, जहां सभी जाति और वर्ग के लोगों ने साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। गांव के बुजुर्गों ने आशीर्वाद देते हुए कहा – “जब तक हनुमान जी की यह भक्ति धारा बहती रहेगी, तब तक हमारा सीहोरा सुख और शांति से भरा रहेगा।”

आज का दिन सीहोरा के लिए सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक था, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। हनुमान जी की जयकारों के साथ समाप्त हुए इस पावन आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि “भक्ति और संस्कृति की डोर जब समाज के हाथों में होती है, तो वह कभी नहीं टूटती।”

जय श्रीराम! जय बजरंगबली! 🚩🙏

ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !

संवाददाता – अर्पित सेन

7806077338, 9109619237

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