भोपाल। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है। तेल कंपनियों ने 25 मई को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ा इजाफा किया है। इस बार पेट्रोल करीब ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा हुआ है। मध्य प्रदेश में टैक्स और वैट अधिक होने के कारण कई शहरों में पेट्रोल 116 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जबकि डीजल ने भी 100 रुपए प्रति लीटर का आंकड़ा पार कर लिया है।
नई दरों के अनुसार राजधानी भोपाल में पेट्रोल 114.65 रुपए और डीजल 99.74 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं उज्जैन प्रदेश का सबसे महंगा शहर बन गया है, जहां पेट्रोल 115.03 रुपए और डीजल 100.11 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। इंदौर में पेट्रोल 114.54 रुपए और डीजल 99.57 रुपए प्रति लीटर हो गया है। इसके अलावा जबलपुर और ग्वालियर में भी कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

यह मई महीने में पेट्रोल-डीजल की चौथी बढ़ोतरी है। इससे पहले 15 मई, 19 मई और 23 मई को भी दाम बढ़ाए गए थे। लगातार चार बार हुई वृद्धि के बाद पिछले 11 दिनों में पेट्रोल और डीजल करीब 8 रुपए प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। इससे आम लोगों के बजट पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।
इस महीने कब-कब बढ़े दाम?
- 15 मई 2026 — पहली बार करीब ₹3 प्रति लीटर बढ़ोतरी
- 19 मई 2026 — दूसरी बार करीब 90 पैसे प्रति लीटर वृद्धि
- 23 मई 2026 — तीसरी बार 87 से 91 पैसे तक इजाफा
- 25 मई 2026 — चौथी बार करीब ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में यह लगातार वृद्धि आने वाले दिनों में महंगाई को और बढ़ा सकती है। खासतौर पर डीजल महंगा होने का असर परिवहन और कृषि क्षेत्र पर सबसे ज्यादा पड़ता है।
मालभाड़ा और रोजमर्रा की चीजें होंगी महंगी
डीजल महंगा होने से ट्रक, टेम्पो और मालवाहक वाहनों का किराया बढ़ सकता है। इसका सीधा असर सब्जियों, फलों, राशन और रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं पर पड़ेगा। व्यापारियों का कहना है कि अगले दो-तीन दिनों में मालभाड़ा बढ़ सकता है, जिसके बाद बाजार में वस्तुओं के दाम बढ़ना लगभग तय है।

खेती की लागत बढ़ेगी
डीजल की कीमतें बढ़ने से किसानों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और पंपिंग सेट जैसे कृषि उपकरण डीजल से चलते हैं। ऐसे में खेती की लागत बढ़ेगी, जिसका असर फसलों और अनाज की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
बस और ऑटो किराए में भी बढ़ोतरी संभव
सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी इसका असर पड़ेगा। बस संचालक और ऑटो चालक किराया बढ़ाने की तैयारी में हैं। स्कूल बसों का किराया बढ़ने की भी संभावना जताई जा रही है। इसका असर मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों पर अधिक पड़ेगा।
क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?
विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में आई तेजी इसके पीछे मुख्य वजह है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। कुछ समय पहले तक क्रूड ऑयल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से सरकारी तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया था। कंपनियों का कहना है कि उन्हें भारी घाटा उठाना पड़ रहा था, इसलिए कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ी।
ऐसे तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर पेट्रोल-डीजल के रेट तय होते हैं।
कीमत तय होने की प्रक्रिया में कई चरण शामिल होते हैं:
- कच्चे तेल की कीमत (बेस प्राइस)
- रिफाइनिंग लागत और तेल कंपनियों का मार्जिन
- केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और रोड सेस
- डीलर कमीशन
- राज्य सरकार का वैट (VAT)
मध्य प्रदेश में वैट दरें कई राज्यों की तुलना में अधिक हैं, इसलिए यहां ईंधन की कीमतें ज्यादा रहती हैं। सीमावर्ती उत्तर प्रदेश के जिलों में पेट्रोल-डीजल अपेक्षाकृत सस्ता मिल रहा है।
तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान
सरकार के मुताबिक इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों को लगातार घाटा हो रहा था।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने लगभग 30 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आम जनता पर महंगाई का बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि समय रहते कदम नहीं उठाने के कारण हालात बिगड़ते गए।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी और एक्साइज ड्यूटी में भी कमी की गई थी। हालांकि अब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और बढ़ते क्रूड ऑयल के दामों के कारण फिर कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और महंगे हो सकते हैं। इससे महंगाई का दबाव और बढ़ने की आशंका है।