राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के निर्देश पर बाघ गणना के लिए इंदौर वन मंडल का मास्टर तैयार हो चुका है। इस प्लान के तहत वन मंडल में 18 दिसंबर से शाकाहारी और मांसाहारी वन्यप्राणियों की गिनती शुरू होगी, जो 24 दिसंबर तक चलेगी। इसके लिए पहली बार वनमंडल के कर्मचारियों को 2 दिन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
डीएफओ इंदौर प्रदीप मिश्रा ने बताया कि कर्मचारियों को वनमंडल स्तर का प्रशिक्षण पहले दिया जा चुका है, पर 11 और 12 दिसंबर को इसका अभ्यास कराया जाएगा। बाघ गणना के दौरान प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी एसडीओ रालामंडल योहान कटारा और तकनीकी समन्वय की जिम्मेदारी वनरक्षक प्रवीण मीणा को सौंपी गई है।

100 कैमरे लगाए जाएंगे
इंदौर वनमंडल 700 वर्ग किमी का है। बाघों की गणना 200 वर्ग किमी में की जाएगी। जिसके लिए ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे। चयनित क्षेत्र को दो ग्रिड में विभाजित किया गया है। दोनों में कैमरे लगाकर वन्यजीवों पर नजर रखी जाएगी। इसमें वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट का सहयोग लिया जा रहा है। ट्रैप कैमरा को-आर्डिनेशन का जिम्मा वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट के बायोलॉजिस्ट प्रोग्राम मैनेजर विवेक तुमसरे को दी है।
चार चरणों में होगी बाघ गणना
- डीएफओ मिश्रा के अनुसार अखिल भारतीय बाघ गणना 4 चरणों मे होगी। पहले चरण में मैदानी सर्वेक्षण के दौरान बाघों और अन्य मांसाहारी वन्यजीवों पद चिन्ह, मल, पेड़ों पर या जमीन पर उनके पंजों की खरोंच के निशान, शिकार के अवशेष संकलित अथवा दर्ज किए जाते हैं।
- दूसरे चरण में सैटेलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग डेटा के साथ जोड़कर वन की क्षति, अवैध कब्जे, वन्यजीवों के कॉरिडोर और मानवीय दखलंदाजी का आकलन किया जाता है।
- तीसरे चरण में चयनित ग्रिड में कैमरे से वन्यजीवों की निगरानी की जाती है। बाघों की खास धारियों के आधार पर उनकी पहचान कर कैप्चर-रिकैप्चर तकनीक से उनकी संख्या का अनुमान लगाया जाता है।
- चौथे चरण में सभी चरणों से प्राप्त आंकड़े अथवा जानकारी का सांख्यकीय विश्लेषण कर अंतिम वैज्ञानिक रिपोर्ट तैयार की जाती है।