देश को हर साल 33 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व देने वाले मध्यप्रदेश–छत्तीसगढ़ आयकर सर्किल में शीर्ष पद पर अस्थिरता बनी हुई है। आयकर विभाग के सबसे बड़े अधिकारी प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (पीसीसीआईटी) की यहां लंबे समय से स्थायी पदस्थापना नहीं हो पा रही है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा की गई पदस्थापनाओं के चलते बीते एक साल में यहां चार पीसीसीआईटी तैनात हुए और सभी रिटायर होकर चले गए। इसका सीधा असर विभाग के कामकाज, टैक्स कलेक्शन और रिकवरी पर पड़ रहा है।
बुधवार को एमपी–सीजी सर्किल के मौजूदा पीसीसीआईटी ललित कृष्ण दहिया भी रिटायर हो गए। वे सितंबर में मुंबई से प्रमोट होकर भोपाल आए थे, लेकिन मात्र तीन–चार महीने के कार्यकाल के बाद 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो गए। उनके रिटायर होते ही यह अहम पद एक बार फिर अतिरिक्त प्रभार में चला गया है।

राजस्थान के पीसीसीआईटी को अतिरिक्त जिम्मेदारी
ललित कृष्ण दहिया के रिटायरमेंट के बाद वित्त मंत्रालय ने राजस्थान सर्किल के पीसीसीआईटी सुमीत कुमार को मध्यप्रदेश–छत्तीसगढ़ सर्किल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। हालांकि वे फिलहाल जयपुर में पदस्थ हैं और भोपाल में नियमित रूप से मौजूद नहीं रहेंगे। ऐसे में विभाग का संचालन एक बार फिर प्रभारी व्यवस्था के भरोसे चल रहा है।
2025 में ऐसे बदली पीसीसीआईटी की कुर्सी
एमपी–सीजी सर्किल में 2025 के दौरान पीसीसीआईटी पद पर लगातार बदलाव देखने को मिले—
- पुरुषोत्तम त्रिपुरी: 1 जनवरी 2025 को पीसीसीआईटी बने, मात्र तीन माह का कार्यकाल पूरा कर 31 मार्च को रिटायर
- नवरतन सोनी: 1 अप्रैल को पदस्थ हुए, जुलाई में रिटायर
- अपर्णा करण (यूपी सर्किल): 1 जुलाई से 31 अगस्त तक अतिरिक्त प्रभार, वे भोपाल बहुत कम आईं
- ललित कृष्ण दहिया: 1 सितंबर से पदभार संभाला, 31 दिसंबर को रिटायर
अब एक बार फिर यह अहम पद स्थायी अधिकारी के बजाय अतिरिक्त प्रभार में चला गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, अगले महीने तक भोपाल में नए पीसीसीआईटी की घोषणा होने की उम्मीद है।
कामकाज और योजना पर पड़ रहा असर
एमपी–सीजी आयकर सर्किल देश के बड़े राजस्व योगदानकर्ताओं में शामिल है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व के बार-बार बदलने से विभागीय योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। आयकर विभाग का मुख्य कार्य टैक्स कलेक्शन और बकाया रिकवरी है, जिसके लिए दीर्घकालिक रणनीति और निरंतर निगरानी जरूरी होती है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार—
- नया अधिकारी आने पर स्थानीय कार्यप्रणाली समझने में ही एक महीना निकल जाता है
- रणनीति और प्लानिंग बनते-बनते अधिकारी का रिटायरमेंट आ जाता है
- राजस्व बढ़ाने और रिकवरी तेज करने की योजनाएं कागजों तक सीमित रह जाती हैं
नतीजतन, टैक्स कलेक्शन और रिकवरी बढ़ाने की कोशिशें हर बार ठंडे बस्ते में चली जाती हैं।
स्थायी नेतृत्व की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े और संवेदनशील सर्किल के लिए स्थायी और लंबा कार्यकाल पाने वाला पीसीसीआईटी बेहद जरूरी है। इससे—
- दीर्घकालिक राजस्व रणनीति बन सके
- बकाया कर वसूली पर ठोस कार्रवाई हो
- विभागीय अधिकारियों में स्पष्ट दिशा और स्थिरता आए
फिलहाल एमपी–सीजी सर्किल एक बार फिर प्रभारी व्यवस्था के सहारे चल रहा है और सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार कब स्थायी पीसीसीआईटी की नियुक्ति करती है।