राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विराट पथ संचलन की तैयारियों को लेकर खुरई विधायक कार्यालय में आयोजित बैठक में भाजपा युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि “जब भारत पूर्ण रूप से संघमय हो जाएगा, तभी संघ का कार्य पूरा होगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का मुख्य उद्देश्य भारतीयों में राष्ट्रभक्ति, सेवा और समरसता की भावना को जगाना है।

उन्होंने कहा कि आज राष्ट्र सेवा का सबसे बड़ा माध्यम स्वदेशी को अपनाना है। जैसे स्वतंत्रता आंदोलन में स्वदेशी आंदोलन ने देश को आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर किया, वैसे ही आज आत्मनिर्भर भारत की नींव स्वदेशी उत्पादों से मजबूत होगी।
अविराज सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि संघ सदैव यह संदेश देता है कि हमें भारत और हिंदू धर्म पर गर्व करना चाहिए। जब पूरा विश्व चलना सीख रहा था, तब भारत दौड़ रहा था। यह हमारा सौभाग्य है कि हम भारतीय और हिंदू हैं।

उन्होंने बताया कि संघ का उद्देश्य केवल संगठन खड़ा करना नहीं बल्कि भारतीय समाज को जातिवाद से मुक्त कर सामाजिक समरसता की ओर ले जाना है। उन्होंने कहा कि संघ का सिद्धांत है – एक घंटा आत्मविकास और 23 घंटे समाज सेवा।
युवा नेता ने आगे कहा कि संघ ने पंच परिवर्तन का संकल्प लिया है, जिसमें नागरिक कर्तव्य, स्वर का बोध, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता और कुटुंब प्रबोधन शामिल हैं। इन पांचों संकल्पों को संघ के शताब्दी वर्ष तक पूरा करने का लक्ष्य है।

उन्होंने शाखा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शाखा केवल शारीरिक बल नहीं सिखाती बल्कि विचारों की शुद्धि और आत्मनिर्भरता भी प्रदान करती है। शाखा से चार मूल विचार आते हैं – भारत पर गर्व, हिंदुत्व की विचारधारा को आगे बढ़ाना, राष्ट्र पर गर्व और सेवा भाव।
अविराज सिंह ने याद दिलाया कि संघ की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने युवाओं के निर्माण और संस्कारित समाज के निर्माण के उद्देश्य से की थी। आज भी संघ इसी ध्येय को लेकर निरंतर कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि जिस राष्ट्र में विश्व का सबसे प्राचीन धर्म और सबसे प्राचीन सभ्यता है, वह राष्ट्र सदैव प्रधान रहेगा। संघ का कार्य ही है कि हर भारतीय को अपने भारतीय होने और हिंदू होने का गर्व कराना और समाज में समरसता स्थापित करना।