नई दिल्ली, 7 अक्टूबर 2025 सुप्रीम कोर्ट परिसर में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बी. आर. गवई पर जूता फेंकने वाले वकील राकेश किशोर कुमार ने अब अपनी सफाई पेश की है। उन्होंने कहा कि CJI द्वारा भगवान विष्णु को लेकर की गई टिप्पणी से वह गहराई से आहत हुए थे। राकेश ने कहा, “उनके एक्शन पर मेरा रिएक्शन था। मैं नशे में नहीं था और मुझे अपने किए पर कोई अफसोस नहीं है।”
CJI के बयान से आहत हुआ – वकील
वकील राकेश ने कहा कि उन्होंने ऐसा कदम CJI की धार्मिक टिप्पणी के विरोध में उठाया। उनका कहना है कि “यही चीफ जस्टिस जब दूसरे समुदायों से जुड़े मामले आते हैं, तो अलग रवैया अपनाते हैं। हल्द्वानी में रेलवे जमीन पर विशेष समुदाय का कब्जा है, तीन साल से उस पर स्टे लगा है। न्याय में समानता होनी चाहिए।”
SC बार एसोसिएशन ने की निंदा
इस घटना पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि “भगवान विष्णु की मूर्ति मामले में CJI की टिप्पणी को गलत तरीके से दिखाया गया। इससे भ्रम फैला और वकील ने लोकप्रियता पाने के लिए यह हरकत की।” उन्होंने कहा कि इस तरह का व्यवहार न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
जूता फेंकने की घटना और कार्रवाई
यह घटना 8 सितंबर की दोपहर सुनवाई के दौरान हुई, जब CJI की बेंच में एक मामला चल रहा था। तभी वकील राकेश ने अचानक CJI की ओर जूता फेंका। हालांकि जूता बेंच तक नहीं पहुंच पाया और सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उसे काबू में ले लिया।
पुलिस ने वकील को हिरासत में लेकर 3 घंटे तक सुप्रीम कोर्ट कैंपस में ही पूछताछ की। बाद में सुप्रीम कोर्ट अधिकारियों द्वारा औपचारिक शिकायत न किए जाने पर उसे छोड़ दिया गया।
बार काउंसिल की सख्त कार्रवाई
घटना के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और SC बार एसोसिएशन दोनों ने कड़ा रुख अपनाया।
राकेश का लाइसेंस रद्द और रजिस्ट्रेशन निलंबित कर दिया गया।
BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने आदेश जारी कर कहा कि यह वकीलों के आचरण के विरुद्ध है।
15 दिनों में शो कॉज नोटिस जारी किया जाएगा और तब तक राकेश किसी भी अदालत में प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे।
SC बार काउंसिल का बयान
“ऐसा असंयमित व्यवहार न्यायपालिका और वकील समुदाय के पारस्परिक सम्मान को चोट पहुंचाता है। इस तरह के कदम न्याय के ताने-बाने को कमजोर करते हैं।”
“सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” – राकेश का नारा
घटना के बाद वकील राकेश ने नारे लगाते हुए कहा था, “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।” वहीं, CJI गवई ने शांति बनाए रखते हुए अदालत में कहा – “इस घटना से परेशान न हों। मैं भी नहीं हूं। ऐसी चीजें मुझे प्रभावित नहीं करतीं।”