नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2025:
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी की दिल्ली में शुक्रवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान महिला पत्रकारों की एंट्री पर रोक लगाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल उठाया और पूछा,
“भारत में हमारे ही देश की कुछ सबसे सक्षम महिलाओं का अपमान कैसे होने दिया गया, जबकि महिलाएं ही देश की रीढ़ और गौरव हैं?”

विवाद बढ़ने के बाद भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत सरकार या MEA का कोई रोल नहीं था। मंत्रालय ने कहा कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस अफगानी एंबेसी में आयोजित की गई थी और पत्रकारों को बुलाने का निर्णय अफगानिस्तान के काउंसिल जनरल, मुंबई द्वारा लिया गया था।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री के भारत दौरे (9 से 16 अक्टूबर) के दौरान 10 अक्टूबर को चुनिंदा पत्रकारों को ही आमंत्रण भेजा गया था, और अफगान दूतावास भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इस कारण किसी प्रकार की एंट्री नीति का निर्णय भारत सरकार द्वारा नहीं लिया गया।
इस घटना ने महिला पत्रकारों की पेशेवर भूमिका और मीडिया में समान अधिकारों के मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि विदेश दौरे और प्रेस कार्यक्रमों में पत्रकारों की भागीदारी में समानता कैसे सुनिश्चित की जाए।

विदेश मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया कि भारत सरकार का मानना है कि सभी पत्रकारों को समान अवसर मिलना चाहिए, लेकिन विदेशी दूतावास और उनके आयोजन भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं।