कृषकों को प्राकृतिक खेती के लिए किया जाएगा प्रोत्साहित !

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सागर जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने ठोस कदम उठाने की तैयारी की है। कलेक्टर श्री संदीप जी.आर. ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष सागर में आयोजित आत्मा गवर्निंग बोर्ड और जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करें और इस दिशा में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।

कलेक्टर ने कहा कि प्राकृतिक खेती से जहां मिट्टी की उर्वरक क्षमता और पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार होता है, वहीं किसानों की खेती लागत में भी उल्लेखनीय कमी आती है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक विकासखंड स्तर पर किसान संघों और कृषि अधिकारियों की संयुक्त बैठकें आयोजित की जाएं, जिसमें प्राकृतिक खेती के लाभों की जानकारी दी जाए। इसके साथ ही जागरूकता संगोष्ठी और प्राकृतिक उत्पादों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाए, ताकि किसान इसकी व्यवहारिक जानकारी प्राप्त कर सकें।

बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री विवेक केवी, अपर कलेक्टर श्री अविनाश रावत, नगर निगम कमिश्नर श्री राजकुमार खत्री, सभी एसडीएम और जनपद पंचायतों के सीईओ सहित कृषि एवं अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

परियोजना संचालक आत्मा जिला सागर द्वारा बैठक में आत्मा योजना, नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग और गवर्निंग बोर्ड की कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आगामी सभी गतिविधियाँ प्राकृतिक कृषि विषय पर केंद्रित होंगी। कृषक भ्रमण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों में वैज्ञानिकों और अनुविभागीय अधिकारियों को शामिल कर कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी और उपयोगी बनाया जाए।

इसके अतिरिक्त कलेक्टर ने कहा कि विकासखंड स्तर पर महिला फूड सिक्योरिटी ग्रुप गतिविधियों को भी आत्मा योजना के लक्ष्यों से जोड़ा जाए। उन्होंने निर्देशित किया कि “एक पेड़ मां के नाम” जैसी पर्यावरणीय पहल और महिला समूहों आधारित गतिविधियाँ एक साथ संचालित की जाएं, जिससे सामाजिक सहभागिता और हरित चेतना को बल मिले।

कलेक्टर संदीप जी.आर. ने सभी एलाइड विभागों (पशुपालन, उद्यानिकी, मत्स्य, रेशम, सहकारिता आदि) को निर्देशित किया कि वे समन्वय स्थापित कर किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि यह समय है जब कृषि पद्धति को रासायनिक निर्भरता से मुक्त कर टिकाऊ और जैविक मॉडल की ओर बढ़ाया जाए।

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