अतिथि शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की तैयारी !

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शिक्षा मंदिरों में घंटी तो बज रही थी, मगर कुछ कक्षाओं में शिक्षक गायब और भविष्य गढ़ने वाले बच्चे बिना दिशा के भटकते नजर आए। कलेक्टर श्री संदीप जी आर की शिक्षा व्यवस्था सुधारने की सख्त मुहिम के तहत जिले के कई सरकारी स्कूलों का आज औचक निरीक्षण हुआ, जिसने कई विद्यालयों की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी।

कलेक्टर ने पहले ही स्पष्ट निर्देश दे दिए थे कि
• शासकीय विद्यालयों में शिक्षक समय पर उपस्थित हों
• ई-अटेंडेंस अनिवार्य रूप से लगाई जाए
• निरीक्षण में कोई कोताही न बरती जाए

इन्हीं निर्देशों के तहत जिला शिक्षा अधिकारी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अलग-अलग ब्लॉकों में सुबह निरीक्षण किया।

निरीक्षण में सामने आई स्थितियां

  1. बिलहनी माध्यमिक शाला, बंडा
    विद्यालय बंद मिला।
    माध्यमिक व प्राथमिक शिक्षक समेत अतिथि शिक्षक अनुपस्थित।
  2. प्राथमिक शाला मड़ैया गोड़, राहतगढ़
    एक शिक्षक उपस्थित, बाकी अनुपस्थित।
    छात्रों की उपस्थिति शून्य पाई गई।
  3. माध्यमिक शाला मड़ैया गोड़, राहतगढ़
    संस्था बंद, शिक्षक अनुपस्थित।
  4. हाईस्कूल कुड़ारी, सागर
    स्कूल संचालित, एक शिक्षक उपस्थित पर उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर नहीं।
  5. बीना क्षेत्र के विद्यालय
    अधिकांश स्कूल नियमित रूप से संचालित।
    दो शिक्षक अनुपस्थित पाए गए, बाकी शिक्षकों की उपस्थिति संतोषजनक।
  6. हाईस्कूल खमरिया, केसली
    पूरा स्टाफ अनुपस्थित।
    50 से अधिक छात्र स्कूल परिसर के बाहर घूमते मिले
  7. हाईस्कूल देवरी नाहरमऊ, केसली
    प्रभारी प्राचार्य समेत पूरा शिक्षक दल गायब।
    फिर 50 से अधिक छात्र दिशा विहीन।

कार्रवाई

कलेक्टर के निर्देश पर
• अनुपस्थित शिक्षकों का एक दिन का वेतन काटा गया
• एक वेतन वृद्धि रोकने हेतु कारण बताओ नोटिस जारी
• अनुपस्थित अतिथि शिक्षकों की सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू

प्रशासन का संदेश

यह निरीक्षण केवल कागज़ी औपचारिकता नहीं, शिक्षा के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता का संकेत है। जब बच्चे स्कूलों में उम्मीद लेकर आते हैं, तो सरकारी अमले का कर्तव्य बनता है कि वे उस उम्मीद की लौ बुझने न दें।

कलेक्टर संदीप जी आर की यह मुहिम संदेश देती है कि
सरकारी नौकरी आराम का मैदान नहीं, जिम्मेदारी का रण है।

और इस रण में जो अपने कर्तव्य से पीछे हटेगा, उस पर अंकुश तय है।

सागर जिले में शिक्षा सुधार की यह पहल अब एक सख्त और सकारात्मक बदलाव का संकेत बन चुकी है। बच्चों की शिक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं, अब जवाबदेही तय होगी।

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