राज्य शिक्षा केंद्र के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश की प्राथमिक शालाओं में एफ.एल.एन (Foundational Literacy and Numeracy) मेले का आयोजन किया गया। इसी क्रम में शासकीय प्राथमिक शाला रिछा, जन शिक्षा केंद्र बरोदियाकलां, विकासखंड मालथौन, जिला सागर में भी यह मेला उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। यह आयोजन कक्षा पहली और दूसरी के विद्यार्थियों में बुनियादी भाषा एवं गणितीय कौशल विकसित करने की दिशा में अहम कदम रहा।

मेले का उद्देश्य बच्चों में सीखने की प्राकृतिक उत्सुकता को प्रोत्साहित करना, शिक्षा को रुचिकर बनाना और समुदाय व विद्यालय के बीच सहयोग को सुदृढ़ करना था। इस अवसर पर विद्यालय परिसर रंग-बिरंगी शिक्षण सामग्री, चार्ट्स, फ्लैश कार्ड, गणितीय उपकरणों और खेल आधारित शिक्षण सामग्री से सजा हुआ दिखाई दिया।
माताओं का विशेष योगदान: जादुई पिटारा बना आकर्षण
मेले का मुख्य आकर्षण माताओं द्वारा तैयार किया गया “जादुई पिटारा” रहा, जिसमें बच्चों के लिए रोचक शैक्षणिक सामग्री एवं गतिविधियाँ शामिल थीं। माताओं की यह भूमिका न केवल प्रेरक रही बल्कि यह भी दर्शाती है कि बच्चों की शिक्षा में परिवार की भागीदारी कितनी महत्वपूर्ण है।
विशेष गतिविधियाँ और सीखने का उत्सव
मेले में पंजीयन काउंटर, शारीरिक विकास, बौद्धिक विकास, भाषा एवं गणित कक्ष तथा “बच्चों का कोना” जैसी थीम आधारित गतिविधियाँ आयोजित की गईं।
बच्चों ने
• अक्षर पहचान
• चित्र बनाना
• वस्तु गिनना
• सामाजिक और भावनात्मक भाव पहचानना
जैसी गतिविधियों में भाग लेकर अपने कौशल का प्रदर्शन किया।
बच्चों की चमकती आँखें, हँसी और गतिविधियों में डूबा उत्साह इस बात का प्रमाण था कि शिक्षा खेल और रचनात्मक तरीकों से कितनी प्रभावी बन सकती है।
विद्यालय व समुदाय की संयुक्त भागीदारी
मां सरस्वती की पूजा शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष श्रीमती पूजा चंदन लोधी द्वारा की गई।
शाला प्रभारी श्री विजय सिंह गौंड ने आयोजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिक्षिकाओं कुमारी रूपाली तिलेश्वर, श्रीमती धनबाद लोधी, श्रीमती खुशबू जाट सहित विद्यालय स्टाफ ने भी सक्रिय सहयोग दिया।

उच्च कक्षाओं के विद्यार्थियों कुमारी कुमकुम जाट, राखी लोधी, कार्तिक लोधी, धर्मेंद्र लोधी, मोना जाट और आरुषि जाट ने स्टॉल संभालकर अनुकरणीय जिम्मेदारी का परिचय दिया।
अभिभावकों की उपस्थिति और सहभागिता ने विद्यालय और समुदाय के संबंधों को और मजबूत किया।
एफ.एल.एन मेला केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सीखने का उत्सव था। यह इस बात का प्रमाण है कि जब बच्चे, शिक्षक और अभिभावक साथ आते हैं, तो शिक्षा एक प्रेरक यात्रा बन जाती है। विद्यालय परिवार ने सुनिश्चित किया कि हर बच्चा न केवल सीख सके, बल्कि मुस्कुरा भी सके।