बीना के शांत गढ़ौला जागीर गांव में शुक्रवार की शाम शिक्षा की गरिमा पर कलंक का एक ऐसा धब्बा लगा, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। जहां स्कूल की घंटियों से ज्ञान की प्रतिध्वनि गूंजनी चाहिए थी, वहां शराब की बोतलों के टकराने की आवाजें और अभद्र व्यवहार की गूंज सुनाई दी। सांदीपनी (सीएम राइज) स्कूल के प्राचार्य और पीटीआई पर शराब और नॉनवेज पार्टी करने के आरोप ने ग्रामीणों के ग़ुस्से को भड़का दिया।

स्कूल का कमरा बना ‘पार्टी स्पॉट’
शुक्रवार शाम, जब अधिकांश बच्चे अपने घरों में किताबों से भविष्य गढ़ रहे थे, तब स्कूल के एक कमरे में शराब की बोतलें, गिलास और चखना सजा था। आरोप है कि प्राचार्य राजेश नामदेव और पीटीआई संदीप ठाकुर इसी कमरे में जश्न मना रहे थे। ग्रामीणों को भनक लगी और माहौल वैसे ही बदला जैसे परीक्षा के दौरान अचानक निरीक्षक कक्षा में आ जाए।
ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर दोनों को रंगे हाथ पकड़ा और स्कूल का गेट बंद कर दिया, ताकि ये ‘शिक्षा के प्रहरी’ बच न पाएं। लेकिन कहते हैं न, गलती करने वालों में भागने की आदत होती है। प्राचार्य और पीटीआई पीछे के रास्ते से फुर्र हो गए।
वीडियो वायरल, गुस्से का ज्वार
घटना का वीडियो ग्रामीणों ने बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। और फिर जो हुआ वह किसी डूबते तारे की तरह था, जिसे पूरा गांव देख रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पहले भी स्कूल में शराब पीने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन इस बार हद तो तब हो गई जब पीटीआई संदीप ठाकुर ने अपने साथी को बुलाया और ग्रामीणों से मारपीट तक की।
राजकुमार उर्फ राजू देवलिया को रोकने पर चोट आई और गांव का आक्रोश भड़क उठा। शिक्षा के पवित्र द्वार पर यह आचरण किसी भी समाज को अस्वीकार्य है।
पुलिस में मामला दर्ज, कार्रवाई की मांग
मामले की शिकायत खुरई ग्रामीण थाने में की गई है। पुलिस ने पीटीआई संदीप ठाकुर और सिद्धार्थ ठाकुर पर मारपीट और अपशब्द कहने का मामला दर्ज किया है। गांव के लोग मांग कर रहे हैं कि दोनों को तत्काल निलंबित किया जाए और स्कूल की निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं।
शिक्षा विभाग की प्रतिक्रिया
जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन ने कहा है कि मामले की जानकारी मिल चुकी है और जांच जारी है। दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं पत्रकारों ने प्राचार्य राजेश नामदेव से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका फोन ऐसे गायब हुआ जैसे परीक्षा के बाद बच्चे कैन्टीन में।
समाज का आईना
यह घटना सिर्फ एक स्कूल की नहीं, बल्कि उस भरोसे की है जिसे समाज शिक्षक के कंधों पर रखता है। शिक्षक मात्र पुस्तकें नहीं पढ़ाते, वे आदर्श गढ़ते हैं। और जब वही आदर्श गिरते हैं, तो भविष्य का पन्ना दागदार हो जाता है।
गांव के लोग इस घटना को सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि शिक्षा के सम्मान पर हमला मान रहे हैं। और वे इसे हल्के में लेने के मूड में नहीं दिखते।
शिक्षा का दीपक वहां कमजोर पड़ गया जहां उसे सबसे अधिक उजाला करना था। अब देखना यह है कि विभाग की कागजी मशाल इसे कितना जलाती है और कितनी बची चिंगारियां न्याय का रास्ता दिखा पाती हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट रिपब्लिक सागर मीडिया !
संवाददाता – अर्पित सेन
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