जब विज्ञान खेतों तक पहुँचता है, तब मिट्टी की हर कण में नई ऊर्जा जन्म लेती है और किसान की मेहनत सुनहरे भविष्य की फसल उगाती है। यही संदेश लेकर आगे आ रही हैं सृष्टि जैन, सृष्टि जैन कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर की अंतिम वर्ष की छात्रा, जो वर्तमान में कृषि विज्ञान केंद्र, सागर में छह माह के प्रशिक्षण पर कार्यरत हैं। उनके अनुसार, “वास्तविक सफलता उसी समय शुरू होती है जब हम विज्ञान और मिट्टी को सही संतुलन के साथ जोड़ते हैं।”

प्रशिक्षण के दौरान सृष्टि ने कृषि मेले में सहभागिता की, जहाँ उन्होंने अपनी टीम के साथ जैविक खेती को प्रोत्साहन देने वाले कई महत्त्वपूर्ण उत्पाद प्रदर्शित किए। इनमें मुख्य थे जीवामृत, घनजीवामृत और नीम आधारित जैव कीटनाशक। इन उत्पादों का लक्ष्य किसानों को रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से दूर ले जाकर, पर्यावरण अनुकूल और अधिक लाभदायक जैविक तरीकों की ओर प्रेरित करना था।
सृष्टि ने बताया कि
• जीवामृत मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाकर उसकी उर्वरता को स्वाभाविक रूप से मजबूत करता है,
• घनजीवामृत फसलों की वृद्धि और रोग प्रतिरोधक क्षमता में मदद करता है,
• और नीम आधारित जैव कीटनाशक रासायनिक जहर के बिना पौधों को कीटों से सुरक्षा प्रदान करते हैं।
उनका विश्वास है कि यदि किसान इन जैविक तकनीकों को अपनाते हैं, तो न सिर्फ मिट्टी की गुणवत्ता और फसल की पोषकता बढ़ेगी, बल्कि आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उनका दावा सरल और प्रभावी है कि जैविक खेती खेती को केवल पर्यावरण हितैषी नहीं बनाती, बल्कि यह किसान की आर्थिक स्थिरता और स्वास्थ्य सुरक्षा का भी मार्ग प्रशस्त करती है।
मेले में मौजूद किसानों को सृष्टि ने संदेश देते हुए कहा, “हमारा उद्देश्य केवल फसल नहीं, भविष्य बनाना है। मिट्टी और पर्यावरण की रक्षा करते हुए खेती को अधिक लाभकारी बनाना ही हमारा संकल्प है। जैविक खेती सिर्फ विकल्प नहीं, आने वाले समय की आवश्यकता है।”
यह युवा कृषि वैज्ञानिकों की नई सोच का प्रतीक है, जहाँ प्रयोगशाला और खेत के बीच की दूरी मिट रही है और प्रकृति से प्रेम करते हुए विज्ञान का हाथ थामकर किसान नई उम्मीदें हासिल कर रहे हैं।