26 अक्टूबर 2025 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया जिसमें छत्तीसगढ़ के रायपुर निवासी अमित बघेल ने कथित रूप से सिंधी समाज के धार्मिक आयोजनों का अपमान किया और उन्हें “पाकिस्तानी सिंधी” जैसे विवादित शब्द से संबोधित किया।
समाज के प्रतिनिधियों ने इस टिप्पणी को न केवल धार्मिक भावनाओं का अपमान बल्कि सामाजिक सम्मान पर सीधा प्रहार बताया। उनका कहना है कि इस तरह की टिप्पणियों से समाज के विरुद्ध अविश्वास और वैमनस्य का माहौल बनता है, जो कानून और सामाजिक मर्यादा दोनों के खिलाफ है।

जुलूस, नारे और न्याय का संकल्प
सुबह सिंधी कैंप क्षेत्र से निकलकर जुलूस डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक और फरसा चौराहा से होते हुए अनुविभागीय कार्यालय पहुंचा। समाज के लोग एकजुट होकर नारे लगाते हुए आगे बढ़े, मानो हर नारे की गूंज में अपनी प्रतिष्ठा बचाने की पुकार थी।
एसडीएम कार्यालय पहुंचकर प्रतिनिधियों ने ज्ञापन सौंपा और कहा कि यह सिर्फ सिंधी समाज का मामला नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता को चुनौती है। उन्होंने मांग की कि आईटी एक्ट और अन्य प्रावधानों के तहत आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी भी समुदाय पर इस तरह की टिप्पणी करने से पहले दस बार सोचे।

समाज के दिग्गज रहे मौजूद
ज्ञापन के दौरान सर्व सिंधी समाज के प्रमुख पदाधिकारी सुनील अहूजा, लक्ष्मनदास नागदेव सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद थे। सभी के चेहरे पर एक ही संदेश साफ था: सम्मान हमारा अधिकार है, और उसकी रक्षा हमारा धर्म।
क्या कहता है समाज?
समाज के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा
“हम सिंधी हैं तो भारतीय हैं। देश और समाज के लिए किए हमारे योगदान को कोई कमतर नहीं कर सकता। इतिहास गवाह है कि सिंधी समाज ने हर संकट में देश के साथ खड़े होकर उसका गौरव बढ़ाया है। ऐसे आपत्तिजनक शब्द स्वीकार नहीं किए जाएंगे।”
प्रशासन की भूमिका
एसडीएम ने ज्ञापन प्राप्त कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कानून व्यवस्था किस गति से इस मामले को आगे बढ़ाती है।
यह घटना सिर्फ एक समुदाय पर की गई टिप्पणी तक सीमित नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि सोशल मीडिया पर शब्दों की स्वतंत्रता का अर्थ किसी की गरिमा को ठेस पहुँचना नहीं है। समाज एकजुट है और संदेश स्पष्ट:
सम्मान की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सिस्टम तक आवाज उठेगी, और गरिमा का दीपक बुझने नहीं दिया जाएगा।