श्योपुर जिले के विजयपुर नगर में मंगलवार दोपहर दिल दहला देने वाली घटना हुई जब गांधी चौक स्थित एक तीन मंजिला पुरानी इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। इमारत का मलबा देखते ही देखते सन्नाटा पसर गया और चीख पुकार मच गई। उसी मलबे में 65 वर्षीय कुसुम मित्तल दब गईं, जिनकी सांसें मानो मिट्टी और ईंटों की मोटी परतों के बीच फंस कर उम्मीद की पतली डोर से जुड़ी रहीं।

सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन तुरंत मौके पर पहुंचा। एएसआई रूपसिंह माझी और टीम ने करीब एक घंटे तक जीवन-मौत की इस जंग में संघर्ष किया। आखिरकार मलबे से एक उम्मीद की किरण उभरी और कुसुम मित्तल को सकुशल बाहर निकाल लिया गया। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज हेतु ग्वालियर रेफर किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी हालत गंभीर लेकिन नियंत्रण में है।
इसी बीच एसडीएम अभिषेक मिश्रा और एसडीओपी राघवेंद्र सिंह तोमर भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरे राहत कार्य पर नजर रखी और आसपास की इमारतों की सुरक्षा जांच के निर्देश दिए, ताकि किसी और दुर्घटना की संभावना न रहे।

स्थानीय लोगों ने बताया कि गांधी चौक क्षेत्र में कई इमारतें पुरानी और जर्जर हैं। लोग महीनों से प्रशासन को चेताते आए थे कि किसी दिन कोई बड़ी त्रासदी हो सकती है। आज का हादसा उस चेतावनी का जीवंत प्रमाण बन गया।
घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया है। नगर में सभी पुरानी और खतरे वाली इमारतों की सूची तैयार कर उनकी जांच शुरू करने की घोषणा की गई है। आवश्यकता पड़ने पर ऐसी इमारतें खाली भी कराई जाएंगी।
यह हादसा सिर्फ दीवारों का ढहना नहीं, बल्कि उन चेतावनियों और अनसुने आवाजों का पतन है जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। सवाल अब यह है कि क्या यह कदम भविष्य के हादसों को रोक पाएगा, या कंक्रीट के जंगलों में ऐसी चीखें फिर गूंजेंगी?