बीना रिफाइनरी के पास सुरक्षा नियमों की अनदेखी — प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध लेबर कॉलोनी निर्माण का मामला उजागर !

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सागर (बीना)। बीना रिफाइनरी के विस्तार कार्य के दौरान गंभीर लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी का मामला सामने आया है। ग्राम हड़कल खाती के पास सीआईएसएफ कैंप के समीप रिफाइनरी के पांच किलोमीटर के प्रतिबंधित (नो डेवलपमेंट जोन) क्षेत्र में एक निजी बीआरसी कंपनी द्वारा लेबर कॉलोनी का अवैध निर्माण किया जा रहा है।
यह निर्माण कार्य बिना किसी आवश्यक अनुमति और स्वीकृति के चल रहा है, जिससे रिफाइनरी की सुरक्षा व्यवस्था और पर्यावरणीय मानकों पर सवाल उठ रहे हैं।


✳ सुरक्षा जोन में निर्माण से बढ़ा खतरा

रिफाइनरी के आसपास सुरक्षा कारणों से पांच किलोमीटर का क्षेत्र “नो डेवलपमेंट जोन” घोषित है। इस दायरे में किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण, व्यावसायिक गतिविधि या आबादी बसाना प्रतिबंधित है।
इसके बावजूद, हड़कल खाती गांव के पास मजदूरों के रहने के लिए अस्थायी कमरों का निर्माण जारी है। बताया जा रहा है कि बीआरसी कंपनी, जो रिफाइनरी विस्तार कार्य में ठेकेदार के रूप में कार्यरत है, ने अपने कामगारों के ठहरने के लिए यह कॉलोनी तैयार करनी शुरू की है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कुछ सप्ताह से क्षेत्र में निर्माण गतिविधि तेजी से चल रही थी। शुरुआत में लोगों ने इसे अस्थायी शेड या गोदाम समझा, लेकिन बाद में पता चला कि यह मजदूर कॉलोनी के रूप में विकसित की जा रही है।


✳ बिना किसी स्वीकृति के हो रहा निर्माण

प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस निर्माण के लिए न तो ग्राम पंचायत से अनुमति ली गई है और न ही क्षेत्रीय विकास नियंत्रण समिति (Regional Development Control Committee) से कोई स्वीकृति प्राप्त की गई है।
रिफाइनरी के सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की मानव बस्ती, अस्थायी या स्थायी ढांचा निर्माण पर सख्त रोक है। इसके बावजूद कंपनी ने नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कार्य शुरू कर दिया।

बीना एसडीएम विजय डेहरिया ने बताया कि “मेरे स्तर से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं दी गई है। यदि बिना स्वीकृति के निर्माण किया जा रहा है, तो इसकी जांच कर कार्य को तत्काल रोका जाएगा।”
एसडीएम ने यह भी कहा कि प्रशासन द्वारा संबंधित कंपनी से जवाब तलब किया जाएगा और आवश्यकतानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


✳ स्थानीय निवासियों ने जताई चिंता

ग्राम हड़कल खाती और आसपास के ग्रामीणों ने इस अवैध निर्माण पर चिंता जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रतिबंधित क्षेत्र में कॉलोनी बसने से न केवल रिफाइनरी की सुरक्षा को खतरा है, बल्कि इससे पर्यावरणीय जोखिम और अग्नि सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन भी हो रहा है।
एक स्थानीय नागरिक ने बताया —

“हमारे गांव के पास अचानक कई मजदूरों का रहना शुरू हो गया है। रात में भी निर्माण चलता है। हमें डर है कि कहीं कोई हादसा न हो, क्योंकि रिफाइनरी के आसपास ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण होता है।”


✳ कंपनी पर उठे गंभीर सवाल

बीआरसी कंपनी, जो रिफाइनरी के विस्तार प्रोजेक्ट से जुड़ी हुई है, पर पहले भी कार्यस्थल सुरक्षा और श्रम नियमों की अनदेखी के आरोप लग चुके हैं।
सूत्रों का कहना है कि कंपनी ने रिफाइनरी प्रबंधन को इस कॉलोनी के बारे में सूचित नहीं किया और “लेबर सुविधा कैंप” के नाम पर गुपचुप तरीके से निर्माण शुरू किया।

रिफाइनरी प्रबंधन के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी को केवल कार्य क्षेत्र में अस्थायी श्रमिक शेड बनाने की अनुमति दी गई थी, न कि प्रतिबंधित क्षेत्र में आवासीय कॉलोनी विकसित करने की। अधिकारी ने कहा कि यह मामला सामने आने के बाद आंतरिक जांच समिति (Internal Safety Review Team) गठित की जाएगी।


✳ रिफाइनरी की सुरक्षा पर पड़ सकता है असर

बीना रिफाइनरी देश के प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादन केंद्रों में से एक है, जहाँ उच्च स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था और CISF की तैनाती रहती है।
ऐसे में प्रतिबंधित क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण कार्य रिफाइनरी की भौतिक और रणनीतिक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नो डेवलपमेंट जोन का उल्लंघन न केवल तेल एवं गैस मंत्रालय के सुरक्षा दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि यह पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) की शर्तों के भी खिलाफ है।
इससे रिफाइनरी की परिधि में असुरक्षित गतिविधियाँ बढ़ने का खतरा है।


✳ प्रशासन की जांच के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। बीना एसडीएम विजय डेहरिया ने संबंधित राजस्व विभाग, पुलिस विभाग और रिफाइनरी प्रबंधन को संयुक्त रूप से क्षेत्र का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।

संभावना जताई जा रही है कि यदि कॉलोनी का निर्माण बिना अनुमति पाया गया, तो प्रशासन तत्काल निर्माण रोकने, अस्थायी ढांचों को हटाने और संबंधित कंपनी पर दंडात्मक कार्रवाई करेगा।


✳ कानून क्या कहता है?

सुरक्षा नियमों के तहत, किसी भी पेट्रोलियम रिफाइनरी, गैस संयंत्र या विस्फोटक क्षेत्र के पांच किलोमीटर के दायरे में कोई स्थायी निर्माण या आबादी बसाने की अनुमति नहीं होती।
यह नियम राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा तय दिशा-निर्देशों का हिस्सा है।

यदि कोई कंपनी या व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 188 (सरकारी आदेश का उल्लंघन), धारा 269 (सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालना) और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।


✳ विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने उठाए सवाल

मामले के सामने आने के बाद स्थानीय सामाजिक संगठनों और विपक्षी नेताओं ने भी प्रशासन से तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि रिफाइनरी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में नियमों की ऐसी अनदेखी होती रही, तो भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस के एक स्थानीय प्रतिनिधि ने कहा —

“सरकार की नाक के नीचे प्रतिबंधित क्षेत्र में कॉलोनी बन रही है और प्रशासन को इसकी खबर नहीं। यह गंभीर लापरवाही है।”

वहीं, कुछ संगठनों ने बीना रिफाइनरी प्रबंधन से भी जवाब मांगने की बात कही कि उनके निगरानी सिस्टम में यह अवैध गतिविधि कैसे नजरअंदाज हो गई।

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