कलेक्टर संदीप जी आर के निर्देश — राजस्व अधिकारी रोज़ मंडियों में करें खरीदी की जांच !

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कलेक्टर संदीप जी.आर. ने जिले के समस्त राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे प्रतिदिन कृषि मंडियों का निरीक्षण कर भावांतर (Price Deficiency Payment) योजना के तहत हो रही खरीदी की प्रक्रिया की कड़ाई से जांच करें तथा किसानों से निरंतर संपर्क बनाए रखें। कलेक्टर ने कहा कि भावांतर योजना सोयाबीन उत्पादक किसानों को उनके उत्पादन का उचित मूल्य सुनिश्चित कराने हेतु अहम है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिये प्रशासनिक अमले को जिम्मेवारी दी गई है।

कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि योजना की प्रमुख शर्तों, पात्रता और ई-पोर्टल पंजीकरण को प्रत्येक स्तर पर प्रचार-प्रसार कर अधिक्तम किसानों को जोड़ना सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि भावांतर भुगतान के अंतर्गत केंद्र द्वारा घोषित एमएसपी (Minimum Support Price) तथा राज्य के मंडी मॉडल भाव/विक्रय मूल्य के बीच का अंतर किसानों को डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से दिया जाएगा। किन्हीं भी स्थिति में—चाहे विक्रय मूल्य एमएसपी से कम हो या राज्य के औसत मॉडल प्राइस से कम—किसान को लाभ दिलाने के प्रावधान स्पष्ट रूप से लागू होंगे।

कलेक्टर ने कहा कि प्रत्येक मंडी में खरीदी के सत्यापन हेतु राजस्व अधिकारी प्रतिदिन उपस्थित रहें, खरीदी रजिस्टर तथा बिक्री बिलों की क्रॉस-चेकिंग करें और ई-पोर्टल पर पंजीकृत किसानों की सूची का मिलान सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि बिना पंजीकरण वाले किसानों को योजनात्मक लाभ नहीं मिलेगा, इसलिए पंजीकरण की सुविधा मंडियों पर और सहज बनाई जाए।

जिला स्तरीय मॉनिटरिंग के लिये कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएँ और खरीदी-विक्री, भुगतान सूची, शिकायतें तथा स्कीम के अंतर्गत आने वाली अड़चनों की त्वरित सुनवाई की जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि मंडियों में आवश्यक मूलभूत सुविधाएं—वेटिंग प्लेटफार्म, डिजिटल पेमेन्ट काउंटर, शेड्यूल्ड पैनल वेट, उजली प्रकाश व सुरक्षा व्यवस्था—सुनिश्चित की जाएँ जिससे किसान को उचित और पारदर्शी सेवा मिले।

कलेक्टर ने इलाके के एसडीएम, तहसीलदार व मंडी अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे किसानों के साथ सतत संवाद बनाकर उनकी समस्याएँ सुनें तथा आवश्यकतानुसार तकनीकी और प्रक्रियात्मक मार्गदर्शन प्रदान करें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी मंडी या खरीद प्रक्रियाओं में अनियमितता पायी जाती है तो संबंधित अधिकारियों/कर्मी हेतु अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।

समाप्ति में कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि प्रदेश व केन्द्र की नीतियाँ किसानों को उनके उत्पादन का मूल्य दिलाने हेतु प्रतिबद्ध हैं और भावांतर योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है — इसलिए इसकी सफलता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन पूरी सक्रियता दिखाएगा।

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