पं. दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर में आज एकात्म मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की भव्य प्रतिमा का अनावरण गरिमामय समारोह में किया गया। यह अवसर महाविद्यालय परिवार के लिए गौरव और प्रेरणा से भरा रहा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक श्री शैलेंद्र जैन रहे। इस अवसर पर श्री श्याम तिवारी, जनभागीदारी समिति अध्यक्ष नितिन शर्मा ‘बंटी’, क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक (उच्च शिक्षा) डॉ. नीरज दुबे, और ओएसडी रामकुमार गोस्वामी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने की।
मुख्य अतिथि विधायक श्री जैन और अतिथियों ने संयुक्त रूप से पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की प्रतिमा का अनावरण किया तथा माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
🔹 कार्यक्रम का शुभारंभ और स्वागत उद्बोधन
कार्यक्रम के आरंभ में प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता ने स्वागत भाषण में पं. उपाध्याय जी के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय केवल एक राजनीतिक चिंतक नहीं, बल्कि “कर्मयोगी, साहित्यकार और राष्ट्रवादी विचारक” थे।
उन्होंने बताया कि पं. उपाध्याय जी ने ‘चंद्रगुप्त मौर्य’ और ‘जगद्गुरु शंकराचार्य’ जैसे महान भारतीय व्यक्तित्वों पर उपन्यास लिखकर भारतीय संस्कृति को नई दिशा दी।

🔹 विधायक शैलेंद्र जैन का संबोधन — “संवेदनशील नेतृत्व ही राष्ट्र का पथप्रदर्शक”
अपने प्रेरक संबोधन में विधायक श्री शैलेंद्र जैन ने कहा कि “देश का संचालन वही व्यक्ति कर सकता है, जो समाज की संवेदनाओं से जुड़ा हो।”
उन्होंने पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के ‘अंत्योदय’ सिद्धांत की चर्चा करते हुए कहा कि जब तक समाज के सबसे पीछे खड़े व्यक्ति का कल्याण नहीं होता, तब तक राष्ट्र की उन्नति अधूरी रहती है।
उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पं. उपाध्याय जी की इस भावना को “नीति से क्रियान्वयन तक” लेकर जा रहे हैं।

🔹 श्याम तिवारी का संबोधन — “पंडित जी की जीवनी छात्रों के लिए प्रेरणा स्रोत”
श्री श्याम तिवारी ने प्रतिमा स्थापना को ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय की जीवनी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
उन्होंने कहा कि “अभाव में भी उत्कृष्टता प्राप्त करना और समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति समर्पित रहना — यही पं. उपाध्याय जी के जीवन का संदेश है।”
उन्होंने जोड़ा कि आज की सरकारें उनके “दरिद्र नारायण की सेवा ही नारायण की सेवा है” के दर्शन पर कार्य कर रही हैं।

🔹 जनभागीदारी समिति अध्यक्ष नितिन शर्मा का भावुक संबोधन
कार्यक्रम के समापन अवसर पर जनभागीदारी समिति अध्यक्ष नितिन शर्मा ‘बंटी’ ने सभी अतिथियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “शिक्षक परिवार का सदस्य होने के नाते यह पद मेरे लिए केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि ‘आत्मा की पुकार’ था।”
उन्होंने कहा कि उनका संकल्प रहा है कि यह महाविद्यालय केवल अध्ययन का केंद्र नहीं, बल्कि जीवन निर्माण की भूमि बने।
श्री शर्मा ने कहा कि “इस शिक्षा मंदिर की सेवा करना मेरे जीवन का सौभाग्य और गर्व का विषय रहा है।”
🔹 कार्यक्रम का संचालन और सहभागिता
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अमर कुमार जैन ने किया।
महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, अतिथि विद्वान, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान के साथ समारोह संपन्न हुआ।
🔹 संक्षेप में कार्यक्रम की प्रमुख झलकियां:
- पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की भव्य प्रतिमा का अनावरण
- विधायक शैलेंद्र जैन ने एकात्म मानववाद और अंत्योदय के सिद्धांत पर दिया प्रेरक संदेश
- जनभागीदारी समिति अध्यक्ष नितिन शर्मा का भावनात्मक विदाई भाषण
- विद्यार्थियों को उपाध्याय जी के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान