मिलिंग कार्य में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी: खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत !

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प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धान मिलिंग कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी भी जिले में मिलिंग कार्य के दौरान अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित मिलर के साथ-साथ जिला और क्षेत्रीय प्रबंधक के खिलाफ भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मंत्रालय में प्रदेशभर के मिलर्स के साथ समीक्षा बैठक

श्री राजपूत ने मंत्रालय में आयोजित बैठक में विपणन वर्ष 2025-26 की मिलिंग नीति के प्रारूप पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में खाद्य विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरुण शमी, खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक अनुराग वर्मा, और प्रदेशभर के मिलर्स मौजूद थे।

बैठक के दौरान शहडोल-उमरिया क्षेत्र के मिलर्स ने एनसीसीएफ के प्रभारी एवं कर्मचारियों के कार्य व्यवहार पर आपत्ति जताई। इस पर श्री राजपूत ने एनसीसीएफ प्रभारी और संबंधित ब्रांच मैनेजर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के साथ कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश अपर मुख्य सचिव को दिए।

धान परिवहन में पहली बार जीपीएस अनिवार्य

खाद्य मंत्री ने कहा कि अब धान परिवहन कार्य में लगे सभी वाहनों पर जीपीएस ट्रैकर अनिवार्य रूप से लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय धान के अंतर-जिला परिवहन में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लिया गया है।
उन्होंने चेतावनी दी —

“यदि कोई ट्रक बिना जीपीएस ट्रैकर के पाया गया, तो संबंधित कर्मचारी, परिवहनकर्ता और मिलर — तीनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि सभी वाहनों का सत्यापन परिवहन सेवा पोर्टल के माध्यम से कराया जाए ताकि किसी भी स्तर पर अनियमितता की संभावना न रहे।

गोदामों की भंडारण क्षमता का होगा भौतिक निरीक्षण

श्री राजपूत ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि मिलर्स के गोदामों की वास्तविक भंडारण क्षमता की पड़ताल की जाए। उन्होंने कहा कि कई मामलों में मिलर्स द्वारा बताई गई गोदाम क्षमता वास्तविकता से कम पाई जाती है, इसलिए जिला स्तरीय समिति द्वारा गोदाम और मिल का भौतिक निरीक्षण अनिवार्य रूप से कराया जाए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जो मिलर्स गुणवत्तापूर्ण कार्य करेंगे, उन्हें इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में तीन से चार गुना अधिक धान मिलिंग के लिए दिया जाए, ताकि उनकी क्षमता का पूरा उपयोग हो सके।

भारत सरकार की तय समयसीमा में पूरी हो मिलिंग

मंत्री राजपूत ने स्पष्ट किया कि धान मिलिंग का कार्य जून 2026 तक हर हाल में पूरा होना चाहिए, जो कि भारत सरकार द्वारा तय की गई समयसीमा है।
उन्होंने नान के प्रबंध संचालक को दिसंबर 2025 से मिलिंग कार्य की सतत निगरानी और समीक्षा शुरू करने के निर्देश दिए। साथ ही निगम मुख्यालय में प्रत्येक 15 दिनों में जिला एवं क्षेत्रीय प्रबंधकों की बैठक कर प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करने को कहा।

मिलर्स को समय पर भुगतान सुनिश्चित करें

बैठक के दौरान कुछ मिलर्स ने भुगतान में देरी की शिकायत की। इस पर अपर मुख्य सचिव श्रीमती रश्मि अरुण शमी ने नान के प्रबंध संचालक अनुराग वर्मा को निर्देश दिए कि मिलर्स को समय पर भुगतान किया जाए और इसकी नियमित समीक्षा की जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि मिलिंग के लिए धान का उठाव सीधे उपार्जन केंद्रों से कराया जाए, ताकि समय और परिवहन लागत दोनों की बचत हो।

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