कृषि विज्ञान केंद्र, देवरी, जिला सागर द्वारा ग्राम सागोनी, विकासखंड केसली में भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जन्मतिथि के अवसर पर जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा 2025 के अंतर्गत कृषक संगोष्ठी सह प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा, कुलगुरु, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर, विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर ए. के. जैन, कुलसचिव एवं डॉ. टी. आर. शर्मा, संचालक विस्तार सेवाएं, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर उपस्थित थे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती और भगवान बिरसा मुंडा की पूजा के साथ किया गया। इसके बाद कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. आशीष त्रिपाठी ने कार्यक्रम की संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत की और किसानों को प्राकृतिक कृषि के विभिन्न आयामों की जानकारी दी।
विशिष्ट अतिथि डॉ. ए. के. जैन, कुलसचिव, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर ने किसानों को रवि मौसम की उन्नत प्रजातियों, पोषक तत्व प्रबंधन और फसल चक्र अपनाकर रोग नियंत्रण के विषय में विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने किसानों को खेती में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर मार्गदर्शन दिया।

डॉ. टी. आर. शर्मा, संचालक विस्तार सेवाएं, ने किसानों को प्राकृतिक कृषि, सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में चना एवं मसूर की खेती, सिंचित क्षेत्रों में गेहूं एवं उद्यानिकी में उच्च तकनीक अपनाने और फसल विवधिकरण के माध्यम से लाभ कमाने के उपाय बताए। उन्होंने किसानों को तकनीकी रूप से उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने के महत्व पर जोर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा ने किसानों को पुरानी किस्मों के संरक्षण, भूमि सुधार और सतत कृषि पद्धतियों के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा के साहस और आदिवासी समाज के विकास में उनके योगदान के बारे में किसानों को जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंतर्गत किसानों के लिए प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्राकृतिक कृषि, उन्नत प्रजातियों और आधुनिक कृषि तकनीकों से संबंधित विभिन्न मॉडलों और प्रदर्शनियों को प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से अपने सवाल पूछकर मार्गदर्शन प्राप्त किया।
इस संगोष्ठी और प्रदर्शनी का उद्देश्य किसानों में वैज्ञानिक और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने की प्रेरणा देना, भूमि और फसल संरक्षण के तरीकों को साझा करना और भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों से किसानों को प्रेरित करना था। कार्यक्रम में किसानों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई और कृषि सुधार तथा उत्पादन बढ़ाने के प्रति अपने संकल्प व्यक्त किए।