खरीफ विपणन वर्ष 2025–26 के लिए राज्य शासन ने धान, ज्वार और बाजरा की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर उपार्जन नीति जारी कर दी है। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य के अनुसार औसत अच्छी गुणवत्ता की फसल किसानों से निर्धारित अवधि में खरीदी जाएगी। यह खरीदी किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी प्रणाली से की जाएगी।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने नीति की जानकारी देते हुए बताया कि शासन ने सभी जिलों के कलेक्टरों, नागरिक आपूर्ति निगम और वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को उपार्जन कार्य का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
खरीदी की अवधि
- ज्वार एवं बाजरा: 24 नवम्बर से 24 दिसम्बर 2025
- धान: 1 दिसम्बर 2025 से 20 जनवरी 2026
- खरीदी सोमवार से शुक्रवार तक होगी।
मुख्यमंत्री एवं विभागीय स्तर पर यह स्पष्ट किया गया है कि समर्थन मूल्य पर उपार्जन की पूरी प्रक्रिया किसानों के लिए सरल और सुगम बनाई जाए।
नोडल एजेंसी और उपार्जन व्यवस्था
- मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन मुख्य नोडल एजेंसी होगी।
- आवश्यकता पड़ने पर केंद्र एवं राज्य सरकार की अन्य एजेंसियों या अधिकृत संस्थाओं को भी उपार्जन एजेंसी बनाया जा सकता है।
मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि किसानों की सुविधा सर्वोपरि है, इसलिए उपार्जन केंद्रों का निर्धारण ऐसी जगह किया जाएगा जहाँ किसानों को परिवहन और पहुंच में आसानी हो।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) – 2025–26
- धान (कॉमन): ₹2369 प्रति क्विंटल
- धान (ग्रेड–A): ₹2389 प्रति क्विंटल
- ज्वार (मालदंडी): ₹3749 प्रति क्विंटल
- ज्वार (हाइब्रिड): ₹3699 प्रति क्विंटल
- बाजरा: ₹2775 प्रति क्विंटल
उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था
- उपार्जन केंद्र प्राथमिकता से गोदाम/केप परिसर में स्थापित होंगे।
- गोदाम की अनुपलब्धता में समिति या अन्य उपयुक्त स्थान पर केंद्र बनाए जा सकेंगे।
- केंद्रों की संख्या का निर्धारण पंजीकृत किसानों, दर्ज रकबे और पिछले वर्ष के अनुभवों के आधार पर राज्य उपार्जन समिति द्वारा किया जाएगा।
बारदाना प्रबंधन
- धान उपार्जन में 46% पुराने और 54% नए जूट बारदानों का उपयोग किया जाएगा।
- ज्वार और बाजरा का उपार्जन पूर्णतः नए जूट बारदानों में किया जाएगा।
- बारदाने की उपलब्धता सुनिश्चित करना उपार्जन एजेंसी की जिम्मेदारी होगी।
गुणवत्ता परीक्षण और एफएक्यू मानक
- उपार्जन यूनिफॉर्म स्पेसिफिकेशन के अनुसार किया जाएगा, जिसे केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा निर्धारित किया गया है।
- उपार्जन केंद्र में गुणवत्ता परीक्षण की जिम्मेदारी उपार्जन संस्था की और गोदाम में उपार्जन एजेंसी की होगी।
- एफएक्यू गुणवत्ता की धान, ज्वार और बाजरा को समर्थन मूल्य से कम पर किसी भी स्थिति में खरीदा नहीं जाएगा।
- नॉन–एफएक्यू उपज का नमूना कृषि उपज मंडी द्वारा सुरक्षित रखा जाएगा।
किसान पंजीयन और विक्रय की प्रक्रिया
- किसानों द्वारा पंजीयन में दर्ज फसल रकबा और राजस्व विभाग द्वारा तय उत्पादकता के आधार पर विक्रय योग्य अधिकतम मात्रा तय की जाएगी।
- उपज बेचने के लिए किसान को उपार्जन केंद्र और विक्रय तिथि के चयन हेतु स्लॉट बुकिंग करानी होगी।
परिवहन व्यवस्था
- उपार्जित अनाज का उपार्जन केंद्र से गोदाम तक परिवहन उपार्जन एजेंसी की जिम्मेदारी होगी।
- धान का उपार्जन केंद्र/गोदाम से सीधे मिलर्स तक परिवहन मिलर्स द्वारा किया जाएगा।
खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि खरीफ 2025–26 की एमएसपी नीति किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगी। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी किसान उचित मूल्य से वंचित न रहे और उपज का भुगतान समय पर तथा पूर्ण पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित हो।