मध्यप्रदेश में SIR सर्वे का तनाव बढ़ा रहा खतरा: 10 दिन में 6 बीएलओ की मौत, कई अस्पताल में भर्ती !

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मध्यप्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) पर बढ़ते काम के दबाव ने गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। मात्र 10 दिनों में 6 बीएलओ की मौत और कई की गंभीर तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद लगातार ड्यूटी और अधिकारियों के दबाव ने कर्मचारियों को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ दिया है।

राज्य की 230 विधानसभा सीटों पर 4 नवंबर से SIR कार्य चल रहा है। प्रदेश के 5 करोड़ 74 लाख 5 हजार मतदाताओं के रिकॉर्ड्स के डिजिटलाइजेशन के लिए 65,014 बीएलओ की ड्यूटी लगाई गई है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि SIR को चुनावी कार्य जितना ही संवेदनशील माना जा रहा है, लेकिन सुविधाएँ व सुरक्षा बिल्कुल नहीं दी जा रही।

कर्मचारी संघ की मांग

मप्र तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने मुख्य चुनाव आयुक्त (नई दिल्ली) को पत्र भेजकर मांग की है—

  • एसआईआर सर्वे के दौरान मृत कर्मचारियों के परिजन को 15 लाख रुपए की सहायता दी जाए।
  • घायल या बीमार कर्मचारियों का इलाज पूर्णतः मुफ्त हो।
  • बीएलओ पर अनावश्यक दबाव डालने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

अब तक सामने आए 6 मौत के मामले

मामला 1: शहडोल – अधिकारी का फोन आते ही तबीयत बिगड़ी, रास्ते में मौत

सोहागपुर के बीएलओ मनीराम नापित (54) पतेरिया गांव में SIR फॉर्म भरवा रहे थे। एक अधिकारी का फोन आते ही उनकी तबीयत बिगड़ गई। बेटे ने उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश की लेकिन रास्ते में ही उनका निधन हो गया।


मामला 2: नर्मदापुरम – ट्रेन की चपेट में आए SIR सर्वे से लौटते समय

पिपरिया के सहायक शिक्षक सुजान सिंह रघुवंशी सर्वे से लौटते वक्त रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आए। गंभीर हालत में भोपाल रेफर किया गया, जहां उनकी मौत हो गई।


मामला 3: मंडीदीप – ऑनलाइन मीटिंग खत्म होने के 10 मिनट बाद मौत

बीएलओ रमाकांत पांडे (शिक्षक) रात में ऑनलाइन मीटिंग में शामिल थे। 10 मिनट बाद हार्ट अटैक से गिर पड़े। परिजन उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन बचाया नहीं जा सका।


मामला 4: झाबुआ – SIR के दबाव में आए शिक्षक की मौत, पहले किया गया था सस्पेंड

शिक्षक भुवान सिंह चौहान को 18 नवंबर को SIR कार्य में कथित लापरवाही पर सस्पेंड किया गया था। परिवार का आरोप है कि तनाव के कारण उन्हें हार्ट अटैक आया। पोस्टमॉर्टम में कार्डियक अरेस्ट की पुष्टि हुई।


मामला 5: दमोह – इलाज के दौरान बीएलओ ने दम तोड़ा

बीएलओ सीताराम गोंड की तबीयत बिगड़ने पर जिला अस्पताल से जबलपुर रेफर किया गया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।


मामला 6: बालाघाट – आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अनीता नागेश्वर की मौत

बीएलओ अनीता नागेश्वर (50) की तबीयत बिगड़ने के बाद नागपुर में इलाज के दौरान मौत हो गई।
परिवार का आरोप—SIR के भारी प्रेशर से तबीयत और बिगड़ गई।
अधिकारी का दावा—शायद किसी कीड़े के काटने से संक्रमण फैला, लीवर डैमेज हुआ।

परिजन ने 25 लाख मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी की मांग की है।


सिर्फ मौतें ही नहीं, कई बीएलओ अस्पताल में भर्ती

भोपाल – दो बीएलओ को हार्ट अटैक

  • मतदान केंद्र-45 के बीएलओ कीर्ति कौशल को हार्ट अटैक आया।
  • बीएलओ मोहम्मद लईक को भी ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक आया।

दोनों का इलाज जारी है।


रीवा – शिक्षक बीएलओ विजय पांडे को ब्रेन हेमरेज

परिजनों का आरोप—

  • वे कई दिनों से बुखार में भी ड्यूटी कर रहे थे।
  • नोडल अधिकारी सर्वे पूरा करने का दबाव डाल रहे थे।
  • बीमारी नजरअंदाज कर लगातार फील्ड में भेजा गया।

भिंड – हार्ट मरीज शिक्षक को भी 14 घंटे ड्यूटी पर लगाया

बीएलओ रविंद्र शाक्य पहले से हृदय रोगी थे और एम्स में इलाज चल रहा था।
परिजन बोले—

  • बीमारी को बहाना बताया गया
  • सस्पेंड करने की धमकी देकर सुबह 9 से रात 11 बजे तक ड्यूटी लगाई गई
    शाक्य की हालत गंभीर है।

बीएलओ क्यों टूट रहे हैं? – मुख्य कारण

लंबे समय तक लगातार फील्ड वर्क (9 से 14 घंटे तक)

गांव-गांव जाकर घर-घर सत्यापन का दबाव

डिजिटल फॉर्म अपलोड का अतिरिक्त बोझ

बीमार होने पर भी छुट्टी न मिलने के आरोप

अधिकारियों की धमकियां, सस्पेंशन का डर

दूरस्थ क्षेत्रों में खराब नेटवर्क और तकनीकी दिक्कतें

SIR प्रक्रिया चुनाव जितनी ही संवेदनशील, लेकिन सुविधाएँ आधी भी नहीं।

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