बीना, 23 दिसंबर 2024
सोमवार को बीना में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों ने तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी किसानों ने केंद्र सरकार पर दमनकारी नीतियों और वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन तहसील कर्मचारी को सौंपा। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के बाद उन्हें नए तरीकों से लागू करने की कोशिशों के खिलाफ अपना विरोध जताना और किसानों के हितों से जुड़ी लंबित समस्याओं का समाधान करना था।

प्रदर्शन के मुख्य मुद्दे
1. भूमि अधिग्रहण का विरोध:
किसानों ने अपनी जमीन को कंपनियों को देने की नीति का कड़ा विरोध किया। उनका कहना है कि भूमि अधिग्रहण के नाम पर किसानों को उनकी आजीविका से वंचित किया जा रहा है।
2. चुनावी वादों की अनदेखी:
किसानों ने सरकार पर चुनावी वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि फसलों का दाम स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय किया जाए और किसानों को खाद, बीज और सिंचाई के लिए जरूरी संसाधन मुहैया कराए जाएं।
3. आवारा पशुओं की समस्या:
किसानों ने आवारा पशुओं से फसलों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाया और सरकार से इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
4. राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति का विरोध:
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति के मसौदे को किसानों के लिए घातक बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि यह नीति छोटे किसानों को खेती से बाहर कर कॉर्पोरेट्स को लाभ पहुंचाने की साजिश है।

नेताओं के बयान
भारतीय किसान श्रमिक जनशक्ति यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष संदीप सिंह ठाकुर ने कहा, “सरकार को किसानों के साथ चर्चा करनी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए। दिल्ली में संघर्षरत किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल की जान बचाने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। किसानों पर हो रहे दमन को तुरंत रोका जाना चाहिए।”
संभागीय अध्यक्ष सीताराम सिंह ठाकुर ने केंद्र सरकार की नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी संघर्षरत किसानों से बात करने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का यह रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पंजाब, उत्तर प्रदेश, और अन्य राज्यों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों पर आंसू गैस, रबर की गोलियां और पानी की बौछारों का इस्तेमाल करना लोकतंत्र का अपमान है।

दमनकारी नीतियों के खिलाफ आक्रोश
प्रदर्शनकारी किसानों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने किसानों की समस्याओं को सुलझाने की बजाय दमनकारी उपाय अपनाए हैं। उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों को वापस लेने के बावजूद उन्हें दूसरे रूप में लागू करने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा, किसानों को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने से रोकने के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
ज्ञापन में मांगे
- राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति को वापस लेना।
- 9 दिसंबर, 2021 को सरकार और किसान संगठनों के बीच हुए समझौते के तहत लंबित मुद्दों का समाधान।
- स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करना।
- खाद, बीज और सिंचाई संसाधनों की उचित व्यवस्था।
- आवारा पशुओं के आतंक को रोकने के लिए ठोस कदम।

बीना में किसानों का यह प्रदर्शन सरकार को स्पष्ट संदेश देता है कि कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भूमि अधिग्रहण, राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति, और चुनावी वादों को लेकर किसानों की नाराजगी गहराती जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन और तेज होगा।