भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन 92 साल की उम्र में हुआ। 26 दिसंबर 2024 की रात को उनकी तबियत अचानक बिगड़ी और उन्हें दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में भर्ती कराया गया था। हालांकि, अस्पताल और उनके परिवार की तरफ से अभी तक उनकी मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन कई प्रमुख नेताओं जैसे रॉबर्ट वाड्रा, पप्पू यादव, मनोज झा और सलमान खुर्शीद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।

मनमोहन सिंह के निधन की खबर के बाद, कर्नाटक के बेलगावी में चल रही कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक को रद्द कर दिया गया है। 27 दिसंबर को होने वाले सभी कार्यक्रमों को भी स्थगित कर दिया गया है। राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं, जबकि प्रियंका गांधी AIIMS पहुंच चुकी हैं और सोनिया गांधी भी जल्द ही अस्पताल पहुंचने वाली हैं। अस्पताल के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे।
डॉ. मनमोहन सिंह का अकादमिक और राजनीतिक सफर
मनमोहन सिंह का जीवन एक प्रेरणा है, जो भारतीय राजनीति और अर्थशास्त्र में उनके योगदान को दर्शाता है। उनकी यात्रा की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में हुई थी और बाद में वह भारत के प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचे।

- शिक्षक के रूप में करियर:
- 1957-1965: डॉ. मनमोहन सिंह ने चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य शुरू किया।
- 1969-1971: दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रोफेसर रहे।
- 1976: दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में मानद प्रोफेसर बने।
- केंद्रीय बैंकों और योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका:
- 1982-1985: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में कार्य किया।
- 1985-1987: योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे।
- आर्थिक सलाहकार और वित्त मंत्री:
- 1990-1991: प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार रहे।
- 1991: नरसिंहराव सरकार में वित्त मंत्री बने और भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। उन्होंने भारत के आर्थिक उदारीकरण की शुरुआत की, जो भारतीय आर्थिक परिदृश्य का सबसे बड़ा परिवर्तन था।
- राजनीतिक यात्रा:
- 1991: असम से राज्यसभा के सदस्य बने और सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
- 1996: दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में मानद प्रोफेसर बने।
- 1999: दक्षिण दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन हार गए।
- 2001: तीसरी बार राज्यसभा सदस्य बने और कांग्रेस के विपक्षी नेता के रूप में कार्य किया।
- 2004-2014: भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाया, भारत के वैश्विक संबंधों को मजबूत किया, और 2008 के आर्थिक संकट से उबारने के लिए कई उपाय किए।
- राज्यसभा से रिटायरमेंट: डॉ. मनमोहन सिंह ने 3 अप्रैल 2024 को राज्यसभा से रिटायरमेंट लिया। वे 1991 में पहली बार असम से राज्यसभा के सदस्य बने थे और 33 साल तक राज्यसभा के सदस्य रहे। उनका अंतिम कार्यकाल 2019 में समाप्त हुआ, जब वे राजस्थान से राज्यसभा सांसद बने थे। उनकी रिटायरमेंट पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उन्हें एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि, “अब आप सक्रिय राजनीति में नहीं होंगे, लेकिन आपकी आवाज़ और अनुभव हमेशा जनता के लिए उपयोगी रहेगा।”
- सोनिया गांधी का राज्यसभा प्रवेश: डॉ. मनमोहन सिंह की सीट पर, कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी राज्यसभा के सदस्य के रूप में पहली बार 20 फरवरी को निर्विरोध चुनी गईं। यह कदम उनके राजनीतिक उत्तराधिकार की दिशा में महत्वपूर्ण था।

मनमोहन सिंह की कूटनीति और विरासत
मनमोहन सिंह की कूटनीतिक और आर्थिक नीतियों ने भारत को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दी। उनका कार्यकाल भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। उन्होंने नरसिंहराव सरकार के दौरान आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया को लागू किया, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में एक नई दिशा दी। उनके कार्यकाल के दौरान भारत ने अमेरिका के साथ ऐतिहासिक परमाणु समझौता किया, जो दोनों देशों के संबंधों में एक नई शुरुआत थी।
उन्होंने भारतीय राजनीति को एक नई दृष्टि दी, जहां आर्थिक सुधार, सामाजिक कल्याण और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई। उनका योगदान भारतीय राजनीति और समाज में अनमोल रहेगा।

चिंता और चिकित्सा स्थिति
मनमोहन सिंह की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी जांच कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें सांस लेने में तकलीफ के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, और उनके परिवार ने प्रार्थना की है कि उनका स्वास्थ्य जल्द ठीक हो।

डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन भारतीय राजनीति, अर्थशास्त्र और कूटनीति में अतुलनीय योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनके राजनीतिक करियर की प्रेरणा और उनकी नीति, जिसने देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया, भारतीय जनता के दिलों में सदैव जीवित रहेगी।