नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में मंगलवार को जन एकता समिति श्रीधाम के नेतृत्व में रैली निकालकर गरीब और वंचित वर्ग के लोगों को भूमि पट्टा योजना का लाभ दिलाने की मांग की गई। समिति ने एसडीएम और नगर पालिका सीएमओ को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि शासन की महत्वपूर्ण योजना की जानकारी पात्र परिवारों तक सही ढंग से नहीं पहुंच रही है, जिससे वे लाभ से वंचित हो सकते हैं।
जानकारी के अभाव पर जताई नाराजगी
समिति ने कहा कि सरकारी आदेशों के बावजूद वार्डों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों को भूमि पट्टा प्रक्रिया की जानकारी तक नहीं दी गई है। सर्वेक्षण की व्यवस्था भी स्पष्ट नहीं है।
जनप्रतिनिधि और वार्ड प्रभारी लोगों का सही मार्गदर्शन नहीं कर पा रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में परिवार आवेदन नहीं कर पाए हैं।
सरकारी निर्देशों का हवाला
ज्ञापन में बताया गया कि कलेक्टर कार्यालय शहरी विकास नरसिंहपुर के पत्र क्रमांक 582/डूडा/2025 तथा नगरीय प्रशासन विभाग, भोपाल के निर्देशों के तहत भूमिहीनों को पट्टा देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
इन निर्देशों के अनुसार —
- 31 दिसंबर 2020 तक शासकीय भूमि पर निवासरत पात्र परिवारों का सर्वे अनिवार्य है।
- सर्वे दल को 13 दिसंबर 2025 तक सूची प्रस्तुत करनी है।
- 14 दिसंबर को पात्र परिवारों की प्रारंभिक सूची जारी की जानी है।

वार्डों में जागरूकता फैलाने की मांग
समिति ने मांग की कि योजना की जानकारी प्रेस, माइक एलाउंस, जनप्रतिनिधियों और वार्ड प्रभारियों के माध्यम से हर परिवार तक पहुँचाई जाए।
गांधी वार्ड, आजाद वार्ड, बजरंग वार्ड, हरदौल वार्ड और गुरुनानक वार्ड जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति, जनजाति और गरीब परिवार वर्षों से बिना किसी भूमि दस्तावेज के रह रहे हैं।
पुराने आवेदनों से मिली परेशानियाँ
समिति ने बताया कि पहले कई नागरिकों ने लोकसेवा केंद्र और ऑनलाइन माध्यम से आवेदन किए थे, लेकिन उचित कार्रवाई न होने से वे परिणामविहीन रहे। इससे कई परिवारों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
समिति ने मांग की कि पहले से उपलब्ध आवेदनों की सूची को आधार बनाते हुए नई सूची तैयार कर सार्वजनिक किया जाए।
समय सीमा बढ़ाने की मांग, आंदोलन की चेतावनी
समिति ने प्रशासन से सर्वेक्षण और जागरूकता अभियान के लिए समयसीमा बढ़ाने का आग्रह किया है। समिति का कहना है कि तय समय में सभी वार्डों और पात्र लोगों तक जानकारी पहुँचाना संभव नहीं है।
चेतावनी देते हुए समिति ने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलनात्मक कदम उठाने को बाध्य होंगे।
गोटेगांव क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।