दमोह जिला न्यायालय में शनिवार को आयोजित लोक अदालत में एक परिवार को बिखरने से बचा लिया गया। हटा ब्लॉक के ग्राम अधरौटा निवासी रेवा रायकवार और गढ़ाकोटा निवासी शंकर रायकवार के बीच पिछले छह माह से चल रहा वैवाहिक विवाद लोक अदालत की संवेदनशील पहल से आपसी सुलह के साथ समाप्त हो गया।
न्यायाधीश और अधिवक्ताओं की मध्यस्थता के बाद दंपती ने अपने बच्चों देवेंद्र और भरत के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दोबारा साथ रहने का निर्णय लिया। शंकर और रेवा का विवाह छह वर्ष पूर्व हुआ था और प्रारंभिक दांपत्य जीवन सामान्य रहा, लेकिन बीते छह महीनों से आपसी संवाद की कमी और गलतफहमियों के चलते विवाद बढ़ गया।

परिजनों के अनुसार पत्नी के मोबाइल पर किसी अन्य व्यक्ति से बातचीत को लेकर पति को संदेह हुआ, जिससे मतभेद गहराते चले गए। मामला इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों के बीच दहेज प्रताड़ना के आरोप लगे और प्रकरण फैमिली कोर्ट तक पहुंच गया।
लोक अदालत में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता नरेंद्र शुक्ला, पंकज खरे सहित अन्य अधिवक्ताओं ने दोनों पक्षों से अलग-अलग एवं संयुक्त रूप से चर्चा कर समझौते का प्रयास किया। इसके बाद परिवार न्यायालय के न्यायाधीश मुहम्मद अजहर ने बच्चों के भविष्य और परिवार की अहमियत समझाते हुए संवेदनशील पहल की, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया।
सुलह के बाद लोक अदालत में भावुक क्षण देखने को मिले। पति-पत्नी ने एक-दूसरे को माला पहनाकर दोबारा अलग न होने का संकल्प लिया। न्यायाधीश और अधिवक्ताओं की ओर से दंपती को पौधे भेंट किए गए, जिससे उनके रिश्ते में प्रेम और विश्वास के बढ़ने का संदेश दिया गया।

लीगल डिफेंस काउंसिल के अधिवक्ता मनीष नगाइच ने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल का अत्यधिक उपयोग और संवाद की कमी कई पारिवारिक विवादों की जड़ बन रही है।
विशेष न्यायाधीश अजय मरावी ने बताया कि लोक अदालत में 21 खंडपीठों का गठन किया गया है, जहां फैमिली कोर्ट, सिविल सहित कुल 690 राजीनामा योग्य प्रकरणों पर सुनवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह मामला समाज के लिए एक प्रेरक उदाहरण है, जहां समय पर समझाइश और संवेदनशील प्रयास से एक परिवार फिर से जुड़ सका।