भोपाल | मध्यप्रदेश विधानसभा के विशेष अधिवेशन की तैयारियों का सोमवार को जायजा लिया गया। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने इस दौरान प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा और विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों को सुरक्षा प्रबंध और बैठक व्यवस्था को लेकर निर्देश दिए। यह विशेष सत्र मध्यप्रदेश विधानसभा के गठन के बाद पहली बैठक के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में बुलाया गया है।
सचिवालय ने बैठक में शामिल होने वाले सभी विधायकों को सत्र की सूचना भेज दी है। अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सत्र के एजेंडा को भी निर्धारित किया है। इस बैठक में कांग्रेस, बीजेपी और अन्य दलों के नेता मध्यप्रदेश के विकास, राज्य को विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने पर अपने विचार रखेंगे। प्रत्येक प्रमुख दल से दस-दस विधायकों को बोलने का अवसर दिया जाएगा।

विधानसभा का इतिहास:
26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद 1952 में पहले आम चुनाव हुए और संसद एवं विधान मंडल कार्यशील बने। 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के बाद नया राज्य मध्यप्रदेश बना, जिसमें मध्यप्रदेश, मध्यभारत, विंध्य प्रदेश और भोपाल की विधानसभाओं को मर्ज कर 1 नवंबर 1956 को पहली मध्यप्रदेश विधानसभा का गठन किया गया। इसका पहला अधिवेशन 17 दिसंबर 1956 को और अंतिम अधिवेशन 17 जनवरी 1957 को आयोजित हुआ।
विशेष अधिवेशन के माध्यम से मध्यप्रदेश की विकास योजना और राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के उपायों पर गहन चर्चा की जाएगी।