भोपाल | मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार के छह साल पुराने आदेश (2019) को लेकर तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में नाराजगी है। इस आदेश के तहत नए नियुक्त कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि तीन साल कर दी गई थी, जिससे कर्मचारियों को पहले तीन साल में 70%, 80% और 90% वेतन मिलता है और केवल चौथे वर्ष में 100% वेतन दिया जाता है। इस वजह से कर्मचारियों को चार लाख रुपये तक का आर्थिक नुकसान हो रहा है।
कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से इस आदेश को निरस्त करने और परिवीक्षा अवधि को दो साल करने की मांग की है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने बताया कि इस नियम का पालन केवल कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से भर्ती होने वाले कर्मचारियों पर किया जा रहा है, जबकि लोक सेवा आयोग से नियुक्त कर्मचारियों को दो साल की परिवीक्षा अवधि में पूरा वेतन मिलता है।

तिवारी ने कहा, “एक ही प्रदेश में दो तरह के नियम लागू होने से न्याय और समानता के सिद्धांत का हनन हो रहा है। कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि में वेतन में होने वाले इस नुकसान को तुरंत रोका जाना चाहिए।”
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि इस आदेश के निरस्त होने से न केवल कर्मचारियों का आर्थिक नुकसान रुकेगा, बल्कि न्यायसंगत और समान नियम लागू होने से शासकीय सेवा में नियुक्ति की पारदर्शिता और संतुलन भी सुनिश्चित होगा।