नरसिंहपुर | जिले की आमगांव बड़ी कृषि उपमंडी पिछले लगभग 35 वर्षों से नियमित रूप से संचालित नहीं हो सकी है। किसानों को बेहतर बाजार सुविधा देने के उद्देश्य से बनाई गई यह मंडी आज तक निष्क्रिय पड़ी है, जिससे क्षेत्र के किसानों को कोई खास लाभ नहीं मिल पा रहा है।
स्थानीय किसानों के अनुसार, मंडी का निर्माण लगभग 35 साल पहले हुआ था, लेकिन इस दौरान यह केवल दो-तीन बार कुछ हफ्तों के लिए शुरू हुई और उसके बाद बंद हो गई। अब तक यहां अनाज की कोई नियमित बोली नहीं लग सकी है।

किसान शिकायत करते हैं कि मंडी परिसर की स्थिति बेहद खराब है। शेड जर्जर हैं, बाउंड्री वॉल टूटी हुई है और मंडी भवन भी रखरखाव के अभाव में खस्ताहाल हो चुका है। परिसर में सुरक्षा के लिए कोई गार्ड तैनात नहीं है। पीने का पानी, शौचालय और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इन अव्यवस्थाओं के कारण किसान अपनी उपज मंडी में लाने से बचते हैं और दूर स्थित मंडियों का रुख करते हैं, जिससे उनका परिवहन खर्च और समय बर्बाद होता है।

मंडी सचिव अरविंद मुदगल ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से यहां गुड़ की मंडी शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन किसानों से माल कम आने के कारण व्यापारी यहां आने में रुचि नहीं दिखाते। उन्होंने कहा कि मंडी की अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए सुधार संबंधी प्रस्ताव पारित हो चुका है और आवश्यक विकास कार्यों की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। जल्द ही मंडी को सक्रिय करने के प्रयास किए जाएंगे।
किसानों का मानना है कि यदि मंडी को सही ढंग से विकसित किया जाए तो आसपास के सैकड़ों किसानों को सीधे लाभ मिल सकता है।