भारत में बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, गलत आदतें और देर से शादी का चलन फर्टिलिटी के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी विषय पर मुंबई की जानी-मानी आईवीएफ विशेषज्ञ और फर्टिलिटी साइंस की पायनियर डॉ. नंदिता पालशेतकर ने महिलाओं और कपल्स को समय रहते जागरूक होने की सलाह दी है। उनका कहना है कि फर्टिलिटी एक टाइम क्लॉक है, जिसे नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी परेशानी बन सकता है।
डॉ. पालशेतकर ने बताया कि करीब 35 साल पहले आईवीएफ की सफलता दर मात्र 15 प्रतिशत थी, जो अब आधुनिक तकनीक और बेहतर लैब सुविधाओं के चलते 60 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद लोग देर से डॉक्टर के पास जाते हैं, जिससे उपचार के विकल्प सीमित हो जाते हैं।

एएनएच टेस्ट से मिलती है भविष्य की तस्वीर
उन्होंने बताया कि एएनएच (AMH) टेस्ट एक सरल ब्लड टेस्ट है, जो पीरियड के दौरान किया जाता है। इससे यह पता चलता है कि महिला की ओवरी में कितने अंडे बचे हैं और प्राकृतिक गर्भधारण के लिए कितना समय शेष है। डॉ. पालशेतकर के अनुसार यह टेस्ट 20 साल की उम्र के बाद कराना सबसे उपयुक्त होता है। इससे लड़कियां शादी और मातृत्व की सही योजना बना सकती हैं।
दो उदाहरण जो बताते हैं टेस्ट की अहमियत
पहले मामले में भोपाल की 34 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल ने करियर के चलते मातृत्व को टाल दिया। बाद में एएनएच टेस्ट से पता चला कि उनका ओवेरियन रिजर्व कम हो चुका है। समय रहते आईवीएफ शुरू करने से आज वह गर्भवती हैं।
दूसरे मामले में भोपाल के एक दंपती ने फैमिली प्लानिंग को लेकर एएनएच टेस्ट कराया, जिससे उन्हें यह स्पष्ट जानकारी मिली कि उनके पास आगे योजना बनाने के लिए अभी पर्याप्त समय है।

लाइफस्टाइल बन रही बड़ी वजह
डॉ. पालशेतकर ने चिंता जताते हुए कहा कि आज इंफर्टिलिटी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। इसकी बड़ी वजह खराब लाइफस्टाइल, फिजिकल एक्टिविटी की कमी, प्रदूषण, धूम्रपान, शराब और पार्टी ड्रग्स हैं। इन आदतों का असर महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों की फर्टिलिटी पर भी पड़ रहा है। पुरुषों में सीमन क्वालिटी और महिलाओं में गर्भधारण की क्षमता कम हो रही है।
उन्होंने साफ कहा कि समय पर जांच, सही जानकारी और विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं से निपटा जा सकता है। जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा समाधान है।