मध्यप्रदेश में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने, बिजली चोरी पर नियंत्रण और किसानों को सस्ती व भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार एक साथ कई स्तरों पर काम कर रही है। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि प्रदेश में बिजली चोरी रोकने के लिए विशेष पुलिसिंग व्यवस्था विकसित की जा रही है, जबकि किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने के लिए सोलर पंप योजनाओं पर तेज़ी से काम हो रहा है।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना और केंद्र सरकार की कुसुम योजनाओं के तहत प्रदेश में सैकड़ों मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित की जा चुकी है। कुसुम-ए योजना के अंतर्गत अब तक 603 अनुबंध किए गए हैं और 957 मेगावाट की परियोजनाएं स्थापित हो चुकी हैं। वहीं कुसुम-सी योजना में 24 परियोजनाएं स्थापित की गई हैं, जिनसे 136 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा।
बिजली कंपनियों में 50 हजार नियमित भर्तियों को मंजूरी
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि बिजली वितरण कंपनियों में लंबे समय से भर्ती न होने के कारण उपभोक्ता सेवाएं प्रभावित हो रही थीं। इस स्थिति को सुधारने के लिए 50 हजार से अधिक नियमित पदों पर भर्ती को मंजूरी दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सभी भर्तियां रेगुलर होंगी, जिससे व्यवस्था में स्थायित्व आएगा।
100 रुपए में 100 यूनिट बिजली का लाभ जारी
मंत्री ने कहा कि प्रदेश के 1 करोड़ 37 लाख बिजली उपभोक्ताओं में से 1 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं को आज भी 100 यूनिट बिजली मात्र 100 रुपए में उपलब्ध कराई जा रही है। किसानों को दी जाने वाली बिजली पर सरकार भारी सब्सिडी दे रही है, जहां एक रुपए की बिजली पर किसान से केवल 7 पैसे लिए जा रहे हैं।
स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के हित में
स्मार्ट मीटर को लेकर उठ रहे सवालों पर ऊर्जा मंत्री ने कहा कि यह पूरी तरह उपभोक्ताओं के हित में है। इससे बिजली खपत की निगरानी, सही बिलिंग और सस्ती सौर बिजली का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है। सुबह 9 से शाम 5 बजे तक सस्ती बिजली का लाभ स्मार्ट मीटर के माध्यम से ही संभव हो पा रहा है।
झुग्गी बस्तियों में बिजली चोरी बड़ी चुनौती
बिजली चोरी के मुद्दे पर मंत्री ने स्वीकार किया कि शहरी क्षेत्रों और झुग्गी बस्तियों में वाणिज्यिक हानि एक बड़ी चुनौती है। इसे रोकने के लिए बिजली थानों की स्थापना, तकनीकी निगरानी और जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
ऊर्जा मंत्री ने भरोसा दिलाया कि वर्ष 2028 तक बिजली की दरें नहीं बढ़ने दी जाएंगी और आने वाले समय में मध्यप्रदेश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।