पं. दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सागर में राष्ट्रीय गणित दिवस के अवसर पर व्याख्यानमाला, निबंध प्रतियोगिता एवं पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं वैदिक गणित के महत्व को रेखांकित करना रहा।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. एल.एल. श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि शून्य और एक के बीच ही पूरी दुनिया समाहित है। उन्होंने बताया कि महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन, जिनके जन्मदिवस पर राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है, ने मात्र 32 वर्ष की अल्पायु में 3884 प्रमेयों की रचना की, जिनमें से अधिकांश को बाद में सिद्ध भी किया गया। यह उनकी अद्भुत प्रतिभा का प्रमाण है।

विशिष्ट वक्ता डॉ. रामकुमार तिवारी ने वैदिक गणित के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गणित की साधना ईश्वर की साधना के समान है। वहीं कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. अमर कुमार जैन ने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हार्डी का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने श्रीनिवास रामानुजन की प्रतिभा को 100 में से 100 अंक दिए थे। उन्होंने रामानुजन के बचपन से जुड़े रोचक प्रसंगों के माध्यम से उनकी असाधारण सोच को विद्यार्थियों के सामने रखा।

कार्यक्रम के दौरान गणित विभाग की छात्रा निदा खान ने संस्कृत श्लोक “यथा शिखा मयूराणां…” का सस्वर पाठ कर उसका अर्थ समझाया, जिसे सुनकर सभागार तालियों से गूंज उठा। छात्रा विशाखा केशरवानी ने कहा कि संपूर्ण ब्रह्मांड गणित पर आधारित है और विज्ञान के सभी विषयों की नींव गणित ही है। वहीं प्रतिभा साहू ने कहा कि श्रीनिवास रामानुजन ने बिना प्रयोगशाला और उपकरणों के अपने मस्तिष्क से पूरी दुनिया को प्रभावित किया और सिद्ध कर दिया कि संख्याएं ही ईश्वर की भाषा हैं। पूजा राय ने अन्य विषयों से गणित की तुलना करते हुए कहा कि गणित के बिना सभी विषय अधूरे हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. रंजना मिश्रा ने सभी वक्ताओं के विचारों का समाहार प्रस्तुत किया और श्रीनिवास रामानुजन के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर जीवन को सफल बनाने के सूत्र बताए।
उद्घाटन सत्र के पश्चात “वैदिक गणित का वैशिष्ट्य” विषय पर निबंध प्रतियोगिता में 80 विद्यार्थियों तथा पोस्टर प्रतियोगिता में 100 विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में डॉ. गोपा जैन, डॉ. सगीता मुखर्जी, डॉ. अवधेश प्रताप सिंह, डॉ. प्रकाश कुशवाहा, डॉ. अनुरूध चढार, डॉ. रेणू सोलंकी, अनुश्री राजे, डॉ. संजय राय, देव कृष्ण नामदेव, भानुप्रिया पटैल, सुनील प्रजापति सहित महाविद्यालय परिवार एवं लगभग 300 विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन संयोजक संतोष कुमार सेन ने किया।