सागर के चांदामऊ आगजनी मामले में मानव अधिकार आयोग ने पुलिस जांच पर उठाए गंभीर सवाल !

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सागर। मध्यप्रदेश के चांदामऊ में 4 दिसंबर की रात हुई आगजनी, जिसमें दो सगे भाइयों की मौत हो गई, अब मानव अधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग की जांच में नया मोड़ ले रही है। आयोग की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद कहा कि यह सिर्फ एक दुर्घटना नहीं बल्कि सोची-समझी साजिश लगती है।


पुलिस की स्कूटी ब्लास्ट थ्योरी पर आयोग ने उठाए सवाल

आयोग के जिला अध्यक्ष ब्रजेश श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस का कहना था कि घर में खड़ी पुरानी स्कूटी के पेट्रोल और बैटरी में ब्लास्ट होने से आग भड़की। लेकिन आयोग की टीम ने निरीक्षण में पाया कि स्कूटी के पास खड़ी दीवार पूरी तरह सफेद थी, उस पर काले धुएं या जलने का कोई निशान नहीं था।

  • यदि इतना बड़ा ब्लास्ट होता, तो दीवार काली जरूर होती।
  • इससे स्पष्ट होता है कि आग नीचे से नहीं बल्कि ऊपर से योजनाबद्ध तरीके से लगाई गई

ग्रामीणों के बयान और पुलिस की लापरवाही

आयोग की टीम ने स्थानीय ग्रामीणों से भी घटना के बारे में पूछताछ की। उनके बयान पुलिस की ओर से प्रस्तुत थ्योरी से मेल नहीं खाते।

  • नरयावली थाना प्रभारी और जरुवाखेड़ा चौकी प्रभारी की जांच अलग-अलग दिशा में चल रही है।
  • पुलिस ने दावा किया कि फईम खान हिरासत में है, लेकिन आयोग की टीम जब थाने और चौकी पहुंची तो वह वहां नहीं मिला।
  • हैरानी की बात यह है कि दो मौतों के बाद भी FIR अभी तक दर्ज नहीं की गई

घटना की पृष्ठभूमि

4 दिसंबर की रात चांदामऊ के एक घर में सो रहे दो भाई और उनकी बहन आग की चपेट में आ गए थे।

  • इलाज के दौरान दोनों भाइयों की मौत हो गई।
  • बहन साक्षी अभी भी अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है।

स्थानीय हिंदू संगठनों और समाज के लोगों ने इसे हत्या करार दिया है और पुलिस से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।


आयोग की टीम का गठन और कार्रवाई

मानव अधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग की टीम में सुनील दुबे, एडवोकेट अर्चना तिवारी, इंदू वैद्य और आशीष तिवारी शामिल थे। टीम ने घटनास्थल का विस्तृत निरीक्षण किया और इस मामले में पुलिस कार्रवाई में गंभीर लापरवाही उजागर हुई है।

आयोग ने सिफारिश की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाए


यह मामला अब सिर्फ साजिश के शक का नहीं, बल्कि पुलिस की लापरवाही और सुरक्षा विफलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीण और समाजसेवी लगातार दबाव बना रहे हैं कि दोषियों को जल्द न्याय दिलाया जाए।

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