सागर। सागर-बीना रेलखंड पर गुरुवार रात एक बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया। जरुआखेड़ा रेलवे फाटक (गेट नंबर-11) पर भूसे से भरा एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर सीधे रेलवे पटरियों पर पलट गया। सौभाग्य से उस समय कोई यात्री या मालगाड़ी उस ट्रैक से नहीं गुजर रही थी, अन्यथा एक भीषण दुर्घटना हो सकती थी।

घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद गेटमैन की सतर्कता और त्वरित निर्णय ने हालात को संभाल लिया और रेल यातायात को समय रहते रोक दिया गया।
चढ़ाई बनी हादसे की वजह, पटरियों पर बिखरा भूसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार ट्रैक्टर चालक रूपेश खुरई मंडी से सोयाबीन का भूसा भरकर सागर की गल्ला मंडी जा रहा था। जैसे ही ट्रैक्टर-ट्रॉली जरुआखेड़ा फाटक के पास पहुंची, वहां मौजूद तेज चढ़ाई के कारण भारी लोड खींच पाना मुश्किल हो गया।
चालक ने संतुलन बनाने की कोशिश की, लेकिन ट्रैक्टर अचानक पीछे की ओर लुढ़क गया और अनियंत्रित होकर ट्रॉली सहित रेलवे ट्रैक पर पलट गया। देखते ही देखते पूरा भूसा पटरियों पर फैल गया, जिससे डाउन ट्रैक पूरी तरह बाधित हो गया।

गेटमैन उधम रैकवार की तत्परता से टली अनहोनी
घटना के समय ड्यूटी पर तैनात गेटमैन उधम रैकवार ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए बिना देर किए रेलवे अधिकारियों को सूचना दी और तुरंत रेल यातायात रुकवाया।
यदि कुछ मिनट की भी देरी होती और उस समय कोई ट्रेन गुजरती, तो बड़ा जान-माल का नुकसान हो सकता था। रेलवे प्रशासन ने गेटमैन की भूमिका को अहम और सराहनीय बताया है।

45 मिनट तक बाधित रहा डाउन ट्रैक
सूचना मिलते ही रेलवे की तकनीकी टीम मौके पर पहुंची। जेसीबी मशीन की मदद से ट्रैक्टर-ट्रॉली और पटरियों पर फैले भूसे को हटाने का काम शुरू किया गया।
करीब 45 मिनट की मशक्कत के बाद डाउन ट्रैक पूरी तरह साफ किया जा सका। इसके बाद मालगाड़ियों और अन्य ट्रेनों की आवाजाही दोबारा शुरू हुई। इस दौरान कुछ ट्रेनों को अस्थायी रूप से रोका गया, जिससे यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
अधूरा ओवरब्रिज बना खतरे की जड़
स्थानीय लोगों ने बताया कि जरुआखेड़ा फाटक पर करीब 48 करोड़ रुपये की लागत से रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन काम अब तक अधूरा है।
ओवरब्रिज अधूरा होने के कारण भारी वाहन अब भी रेलवे फाटक से गुजरने को मजबूर हैं, जहां चढ़ाई और संकरी सड़क के चलते आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। लोगों का कहना है कि यदि ओवरब्रिज का कार्य समय पर पूरा हो जाता, तो इस तरह की घटनाओं से बचा जा सकता था।
प्रशासन के लिए चेतावनी
यह घटना एक बार फिर रेलवे और स्थानीय प्रशासन के लिए चेतावनी है कि अधूरे निर्माण कार्य और असुरक्षित रेलवे फाटकों पर जल्द ठोस कदम उठाए जाएं।
गनीमत यह रही कि इस बार कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यदि समय रहते ओवरब्रिज निर्माण पूरा नहीं किया गया, तो भविष्य में इससे भी बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।