भोपाल। पशुपालन और डेयरी विकास विभाग के मंत्री लखन पटेल और प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने स्पष्ट किया है कि वे स्वयं कड़कनाथ नहीं खाते और वे वेजिटेरियन हैं। हालांकि, कड़कनाथ की मांग को देखते हुए विभाग आगामी समय में योजनाएं तैयार कर इसे लागू करेगा।
मंत्री ने दी विभाग की आगामी योजना की जानकारी
राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री लखन पटेल ने विभाग की आगामी कार्ययोजना के बारे में जानकारी दी। पत्रकारों द्वारा पूछे जाने पर कि विभाग की उपलब्धियों में कड़कनाथ का उल्लेख क्यों नहीं है, प्रमुख सचिव उमाकांत उमराव ने कहा कि वे स्वयं कड़कनाथ नहीं खाते। इस पर मंत्री लखन पटेल ने भी कहा कि वे भी कड़कनाथ नहीं खाते।

गायों की सुरक्षा और सड़कों पर नियंत्रण
मंत्री लखन पटेल ने कहा कि सरकार गायों की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि अब यह प्रैक्टिस शुरू हो गई है कि गाय का दूध दुहने के बाद छोड़ दिया जाता है। जनता को जागरूक करने की आवश्यकता है कि गाय को व्यवस्थित रखा जाए और केवल दूध के लिए ही उपयोग न किया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष सड़कों पर कम गायें देखी गई हैं।
गोशालाओं के लिए नए नॉर्म्स और योजनाएं
मंत्री ने कहा कि सरकार ने एक चिप विकसित की है, जिसके माध्यम से यह पता लगाया जा सकता है कि किस गोशाला में कितनी गायें हैं। गोशालाओं के स्ट्रक्चर और अन्य नॉर्म्स भी तय कर दिए गए हैं। सरकार वर्तमान में हर गाय के लिए 40 रुपए दे रही है।
इसके अलावा कामधेनु योजना के अंतर्गत गायों को रखने और प्रबंधन की योजना भी चल रही है। इसे पीपीपी मोड (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) में लागू करने के लिए प्रस्ताव आया है। हालांकि, पहली बार टेंडर केवल दो आवेदन मिलने के कारण निरस्त किया गया था, अब दूसरी बार इसे लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
भविष्य की दिशा
मंत्री लखन पटेल ने स्पष्ट किया कि विभाग गायों की देखभाल, गोशालाओं की व्यवस्था और कड़कनाथ की मांग के अनुसार योजनाओं को लागू करने में सक्रिय रहेगा। उन्होंने कहा कि जनता और स्वसहायता समूहों को भी इस दिशा में जोड़कर योजनाओं को और प्रभावी बनाया जाएगा।