नागदा में फांसी लगाने वाले युवक की टीआई ने सीपीआर देकर बचाई जान, डीजीपी ने 10 हजार रुपये से किया सम्मानित !

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उज्जैन | नागदा में सोमवार देर रात मानवता और पुलिस की तत्परता की मिसाल देखने को मिली, जब फांसी के फंदे पर झूल रहे एक युवक की जान नागदा थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी ने सीपीआर देकर बचा ली। समय रहते की गई इस कार्रवाई से युवक की सांसें लौट आईं और उसे सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया गया।

घटना नागदा के जनमेजय मार्ग स्थित पानी की टंकी के पास सोमवार रात करीब डेढ़ बजे की है। नागदा थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी उस समय क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान एक व्यक्ति दौड़ते हुए उनके पास पहुंचा और घबराई हुई आवाज में बताया कि उसका बेटा घर में फांसी के फंदे पर झूल रहा है।

सूचना मिलते ही टीआई गवरी बिना एक पल गंवाए युवक के घर पहुंचे। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे तोड़कर वे अंदर दाखिल हुए। युवक फंदे से झूल रहा था। टीआई और परिजनों ने तुरंत चाकू से फंदा काटा और युवक को नीचे उतारा। उस वक्त परिजन युवक को मृत मानकर विलाप कर रहे थे और उसका शरीर कड़क हो चुका था।

सीपीआर से लौटी युवक की सांसें

हालात गंभीर होने के बावजूद टीआई अमृतलाल गवरी ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी पुलिस ट्रेनिंग के दौरान सीखी गई सीपीआर तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया। करीब 2 से 3 मिनट तक लगातार सीपीआर देने के बाद युवक के शरीर में हलचल शुरू हुई और उसकी सांसें लौट आईं। यह देख परिजनों और मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।

इसके बाद टीआई गवरी युवक को अपने वाहन से तत्काल एमपी-13 अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच कर उपचार शुरू किया।

डॉक्टर बोले- समय पर सीपीआर से बची जान

हॉस्पिटल संचालक डॉ. प्रमोद बाथम ने बताया कि युवक को जब अस्पताल लाया गया, तब वह अर्धचेतन अवस्था में था। उसका ऑक्सीजन लेवल कम था और बीपी बढ़ा हुआ था। उसे तुरंत ऑक्सीजन दी गई और निगरानी में रखा गया। कुछ समय बाद उसकी हालत सामान्य हो गई, जिसके बाद परिजन उसे घर ले गए।

डॉक्टरों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि समय पर सीपीआर नहीं मिलता, तो युवक की जान बच पाना मुश्किल था।

पहले भी कर चुका है आत्महत्या का प्रयास

जानकारी के अनुसार, 20 वर्षीय युवक ने पारिवारिक कारणों से फांसी लगाई थी। इससे पहले भी वह दो बार अलग-अलग तरीकों से आत्महत्या का प्रयास कर चुका है। युवक के पिता निजी कंपनी में कार्यरत हैं। युवक के स्वस्थ होने के बाद टीआई अमृतलाल गवरी ने उसकी काउंसलिंग भी की और समझाइश देकर घर भेजा।

डीजीपी ने किया सम्मान

इस साहसिक और मानवीय कार्य के लिए पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने थाना प्रभारी अमृतलाल गवरी को 10 हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित करने के आदेश जारी किए हैं। नगर सुरक्षा समिति के सदस्य राजेश मोरवाल ने भी इस रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिस का सहयोग किया।

पहले भी बचा चुके हैं जान

टीआई अमृतलाल गवरी ने बताया कि करीब छह माह पहले भी उन्होंने सीपीआर देकर एक अधीनस्थ सिपाही की जान बचाई थी। उस दौरान बायपास पर एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें वे स्वयं घायल थे, लेकिन फिर भी उन्होंने सिपाही भारत को सीपीआर देकर उसकी जान बचाई थी।

इस घटना के बाद नागदा थाना परिसर में साथी पुलिसकर्मियों ने टीआई गवरी का स्वागत किया। यह घटना न केवल पुलिस की तत्परता को दर्शाती है, बल्कि सीपीआर जैसी जीवनरक्षक तकनीक के महत्व को भी उजागर करती है।

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