शासकीय गोकुल ग्राम में अवैध मिट्टी खुदाई रोकने पर लेखापाल से मारपीट, तीन पर मामला दर्ज !

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सागर।
जिले के रतौना गांव स्थित शासकीय गोकुल ग्राम पशु प्रजनन प्रक्षेत्र में गुरुवार को उस समय हंगामा हो गया, जब शासकीय परिसर से अवैध रूप से मिट्टी की खुदाई करने से मना करने पर पदस्थ लेखापाल के साथ मारपीट की गई। इस घटना को लेकर परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। लेखापाल की शिकायत पर मोतीनगर पुलिस ने एक नामजद आरोपी समेत तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार फरियादी लेखापाल राजकिशोर दुबे, निवासी बजरंग नगर छतरपुर, वर्तमान में शासकीय गोकुल ग्राम पशु प्रजनन प्रक्षेत्र रतौना में पदस्थ हैं। उन्होंने मोतीनगर थाने में दी गई शिकायत में बताया कि गुरुवार को वे अपने नियमित शासकीय कार्य पर तैनात थे। इसी दौरान ग्राम रतौना निवासी कपिल पाराशर अपने दो साथियों के साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर शासकीय परिसर में पहुंचे और बिना किसी अनुमति के परिसर के अंदर से मिट्टी की खुदाई कर ट्रैक्टर में भरने लगे।

लेखापाल राजकिशोर दुबे ने जब उन्हें शासकीय भूमि से मिट्टी खोदने से मना किया, तो इस बात को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि कपिल पाराशर ने पहले गाली-गलौज शुरू की और विरोध करने पर हाथापाई पर उतर आया। स्थिति बिगड़ती देख लेखापाल ने तत्काल मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रबंधक डॉ. राकेश गौतम को दी।

सूचना मिलते ही प्रबंधक डॉ. राकेश गौतम मौके पर पहुंचे, लेकिन आरोपियों ने उनके साथ भी अभद्र व्यवहार करते हुए गाली-गलौज की। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की। घटना के दौरान परिसर में कार्य कर रहे मजदूरों ने मौके पर पहुंचकर बीच-बचाव किया, जिससे मामला शांत हो सका।

घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी मौके से फरार हो गए। मौके पर शासकीय परिसर में मिट्टी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली भी पाई गई, जिससे अवैध खुदाई की पुष्टि होती है।

मोतीनगर थाना प्रभारी जसवंत सिंह ने बताया कि गोकुल ग्राम पशु प्रजनन प्रक्षेत्र के लेखापाल की शिकायत पर कपिल पाराशर समेत तीन लोगों के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज और शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस द्वारा आरोपियों की तलाश की जा रही है और मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।

घटना के बाद शासकीय कर्मचारियों में रोष देखा गया है। उनका कहना है कि शासकीय परिसरों में इस तरह की अवैध गतिविधियों और कर्मचारियों के साथ मारपीट की घटनाएं चिंताजनक हैं और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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