मध्यप्रदेश सरकार द्वारा शिप्रा नदी को शुद्ध और प्रदूषण मुक्त करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत की गई है, जिसे कान्ह डायवर्सन परियोजना कहा जा रहा है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शिप्रा में मिलने से पहले कान्ह नदी के गंदे पानी को डायवर्ट करके शिप्रा को प्रदूषित होने से बचाना है। इस योजना पर 919 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं और इसका कार्य मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट में हम इस परियोजना के विभिन्न पहलुओं, लाभों, और कार्यान्वयन के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

प्रोजेक्ट का उद्देश्य:
शिप्रा नदी, जो उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है, प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालुओं द्वारा स्नान करने के लिए आस्थाओं का केंद्र बनी रहती है। लेकिन इसके पानी में गंदगी और प्रदूषण की समस्या विशेष रूप से इंदौर से आने वाली कान्ह नदी के गंदे पानी के कारण उत्पन्न हो रही थी। प्रत्येक बड़े स्नान पर्व के दौरान शिप्रा में गंदा पानी बहाकर उसमें नर्मदा का पानी डालने की प्रक्रिया में हर बार लाखों रुपये खर्च होते थे। इसके अलावा, गंदा पानी शिप्रा की स्वच्छता और जल गुणवत्ता को प्रभावित करता था, जो धार्मिक दृष्टि से भी एक बड़ी समस्या बन गई थी।
इस समस्या का स्थायी समाधान कान्ह डायवर्सन परियोजना के रूप में निकाला गया है, जिसमें कान्ह नदी के गंदे पानी को शिप्रा में जाने से पहले डायवर्ट किया जाएगा, जिससे शिप्रा को प्रदूषण से मुक्त रखा जा सके।
कान्ह डायवर्सन परियोजना के मुख्य तत्व:
1. कुल परियोजना की लंबाई और संरचना: इस परियोजना में कुल 30 किलोमीटर लंबी योजना बनाई जा रही है, जिसमें 18 किलोमीटर लंबी गहरी कट एंड कवर (नहर) और 12 किलोमीटर लंबी टनल का निर्माण किया जाएगा। इन दोनों ही संरचनाओं को विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है ताकि कान्ह नदी का गंदा पानी शिप्रा में न पहुंच सके।
- कट एंड कवर (नहर): इस नहर के निर्माण के दौरान भूमि के ऊपर खेती की जा सकेगी, जिससे कृषि कार्य पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
- टनल: 12 किलोमीटर लंबी इस टनल के निर्माण में 100 फीट गहरी टनल बनाई जा रही है, जो विभिन्न स्थानों पर बनाई जा रही है, ताकि पानी को उचित दिशा में डायवर्ट किया जा सके।
2. गहरी कट एंड कवर और टनल: इस योजना में 18 किलोमीटर लंबी गहरी कट एंड कवर नहर बनाई जाएगी, जो मुख्य रूप से पानी को डायवर्ट करने के काम आएगी। इस नहर के ऊपर कृषि कार्य किया जा सकेगा, जिससे पर्यावरण और स्थानीय किसानों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इसके अलावा, 12 किलोमीटर लंबी टनल भी बनाई जा रही है, जो 100 फीट गहरी है और इसे कुछ स्थानों पर और गहरा किया जाएगा (26 मीटर तक)।
3. परियोजना की प्रगति: यह परियोजना जनवरी 2024 में शुरू हुई थी और इसके पहले 6 महीनों में लगभग 15% काम पूरा किया जा चुका है। परियोजना की प्रगति के अनुसार, मार्च 2027 तक इसे पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। इस परियोजना में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या लगभग 400 है, जो दो शिफ्टों में काम कर रहे हैं।
परियोजना का कार्यान्वयन:
1. परियोजना का स्थान: कान्ह डायवर्सन परियोजना का काम इंदौर रोड के जमालपुरा से शुरू होगा। यहां से कान्ह का गंदा पानी डायवर्ट किया जाएगा और उसे गंभीर नदी की डाउन स्ट्रीम में छोड़ा जाएगा। शिप्रा को प्रदूषित होने से बचाने के लिए यहां से पानी को गंभीर नदी में बहाया जाएगा।
2. बैराज और सिलारखेड़ी डेम: शिप्रा को प्रवाहमान बनाए रखने के लिए सेवरखेड़ी गांव में एक बैराज का निर्माण किया जाएगा। इस बैराज के माध्यम से पानी को सिलारखेड़ी डेम में लिफ्ट किया जाएगा, जिससे शिप्रा की जल स्तर को बनाए रखा जा सके।
3. जल स्रोत का डायवर्शन: कान्ह नदी से आ रहे गंदे पानी को डायवर्ट करने के बाद शिप्रा नदी को साफ करने का लक्ष्य है। इस परियोजना के जरिए शिप्रा नदी के प्रदूषण को नियंत्रित किया जाएगा और इसके पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा, जिससे उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर और अन्य धार्मिक स्थानों के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध हो सकेगा।

परियोजना के लाभ:
1. शिप्रा की सफाई और जल गुणवत्ता में सुधार: इस परियोजना के माध्यम से शिप्रा नदी के पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा और यह प्रदूषण से मुक्त हो जाएगी। इससे धार्मिक तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं के स्नान का अनुभव और बेहतर होगा।
2. पर्यावरणीय लाभ: शिप्रा नदी की सफाई से न केवल धार्मिक महत्व बढ़ेगा, बल्कि यह क्षेत्रीय पर्यावरण को भी सुधारने में मदद करेगा। गंदे पानी के डायवर्शन से जल स्रोतों में प्रदूषण कम होगा और स्थानीय जल चक्र पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
3. आर्थिक और सामाजिक लाभ: यह परियोजना ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में जल संरक्षण और स्मार्ट जल प्रबंधन का एक उदाहरण बनेगी। इससे स्थानीय समुदायों को रोजगार मिलेगा और उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
4. सिंघस्थ महाकुंभ के लिए तैयारियां: इस परियोजना को सिंहस्थ महाकुंभ 2028 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि उज्जैन में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को एक स्वच्छ और पवित्र स्नान का अवसर मिल सके।
कान्ह डायवर्सन परियोजना उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में शिप्रा नदी के पानी को साफ करने और प्रदूषण से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस परियोजना के माध्यम से शिप्रा नदी को स्थायी रूप से गंदे पानी से मुक्त किया जाएगा, जिससे न केवल धार्मिक स्थलों का महत्व बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्रीय पर्यावरणीय स्थिति भी सुधरेगी। इस महत्वाकांक्षी योजना की समय पर और सही तरीके से पूर्णता से साथ उज्जैन की आस्थाओं और आसपास के क्षेत्रों की जल गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव होगा।