भागीरथपुरा में 15 दिन बाद भी जल संकट बरकरार, बोरिंग का पानी भी निकला दूषित, 35 सैंपल फेल !

Spread the love

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले 15 दिनों से जारी जल संकट और स्वास्थ्य आपात स्थिति अभी तक पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाई है। पहले नगर निगम की टंकियों से होने वाली जल आपूर्ति बंद की गई थी और रहवासी टैंकर व बोरिंग के पानी पर निर्भर थे, लेकिन अब बोरिंग का पानी भी दूषित पाए जाने से स्थिति और गंभीर हो गई है। जांच में 35 बोरिंग सैंपल फेल हो गए हैं, जिसके बाद प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए क्षेत्र में मौजूद 116 सरकारी और करीब 400 निजी बोरिंग के पानी के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है।

टैंकर ही बना एकमात्र सहारा

भागीरथपुरा के अधिकांश इलाकों में फिलहाल टैंकर से ही पानी की आपूर्ति की जा रही है। रविवार को सुबह से शाम तक 55 टैंकरों ने 250 से अधिक फेरे लगाकर पानी वितरित किया। इसके बावजूद कई स्थानों पर पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाने की शिकायतें सामने आईं।

रविवार को भी स्वास्थ्य और जल प्रदाय विभाग की टीमों ने क्षेत्र की 112 टंकियों, नलों और बोरिंग से पानी के सैंपल लिए। इन सैंपलों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर ने बनाई रणनीति, हर वार्ड में होगा सर्वे

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने नगर निगम आयुक्त और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक ठोस सिस्टम बनाने के निर्देश दिए हैं। तय किया गया है कि नगर निगम और पीएचई (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी) विभाग के अधिकारी हर वार्ड में पानी की लाइनों का सर्वे करेंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दूषित पानी कहां और कैसे सप्लाई हो रहा है।

देशभर से आई विशेषज्ञ टीम

भागीरथपुरा के जल संकट और बीमारी के आउटब्रेक को लेकर अब देशभर से विशेषज्ञ टीमें सक्रिय हो गई हैं। कोलकाता के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैक्टीरियोलॉजी से आए वैज्ञानिक डॉ. प्रमित घोष और डॉ. गौतम चौधरी क्षेत्र में रैंडम सैंपल लेकर वैज्ञानिक जांच कर रहे हैं। इसके साथ ही दिल्ली और भोपाल से आई टीमों ने भी अपनी जांच शुरू कर दी है।

प्रशासन ने भागीरथपुरा को 30 से अधिक जोन में बांटने की रणनीति बनाई है, ताकि निगरानी और नियंत्रण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

स्वास्थ्य विभाग का घर-घर सर्वे तेज

स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र में घर-घर सर्वे और मरीजों के फॉलोअप की गति तेज कर दी है। रविवार को 2354 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें 9416 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई। बीमार पाए गए लोगों को तत्काल इलाज, ओआरएस और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं।

आज से 5 हजार घरों का डिजिटल सर्वे

भागीरथपुरा के मामले में अब केंद्र सरकार भी पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने इस आउटब्रेक को लेकर ‘कोबो टूल’ नाम का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म जारी किया है। सोमवार से 600 लोगों के अमले के साथ युद्धस्तर पर डिजिटल सर्वे शुरू किया जाएगा।

कोबो टूल एक ऑनलाइन मोबाइल एप है, जिसके जरिए हर घर का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसमें यह जानकारी दर्ज की जाएगी कि घर में कौन बीमार है, इलाज चल रहा है या नहीं, क्लोरीनेशन हुआ या नहीं और ओआरएस दिया गया या नहीं। एक टीम एक घंटे में तीन से चार घरों का सर्वे करेगी।

यह डेटा सीधे आईसीएमआर के सिस्टम तक पहुंचेगा, जिससे हर मरीज और हर केस की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सकेगी। इसके लिए 200 डॉक्टर, 200 नर्स और 200 आशा कार्यकर्ताओं की 200 टीमें बनाई गई हैं, जो करीब 5 हजार घरों का सर्वे करेंगी।

मंत्री के बयान पर विवाद, एसडीएम निलंबित

इस बीच राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान को अमानवीय और निरंकुशता की निशानी बताते हुए उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह ने बड़ा कदम उठाया है। कांग्रेस के प्रदर्शन से जुड़े आदेश में लापरवाही बरतने के मामले में एसडीएम आनंद मालवीय और उनके बाबू अमित चौहान को निलंबित कर दिया गया है।

बताया गया कि कांग्रेस ने रविवार को प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन दिया था, जिसे एसडीएम ने बिना पढ़े ही आदेश में ज्यों का त्यों लिख दिया। इस पर कड़ी कार्रवाई करते हुए दोनों को निलंबित कर दिया गया।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

भागीरथपुरा में दूषित पानी, बीमारी का खतरा और पेयजल की कमी प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और केंद्र सरकार की एजेंसियां मिलकर हालात पर काबू पाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन क्षेत्रवासियों को अभी राहत का इंतजार है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *