पेयजल की गुणवत्ता पर सख्त निर्देश: सागर संभाग कमिश्नर अनिल सुचारी ने दिए कड़े आदेश !

Spread the love

सागर संभाग में पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने एवं जलजनित बीमारियों की रोकथाम को लेकर संभागायुक्त श्री अनिल सुचारी ने संभाग के समस्त जिलों के कलेक्टरों के साथ पेयजल वितरण व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नागरिकों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

कमिश्नर श्री सुचारी ने निर्देश दिए कि नल-जल प्रदाय योजनाओं से वितरित किए जा रहे पेयजल की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। इसके लिए उपभोक्ताओं के नल कनेक्शन से सीधे जल के सैंपल लेकर जांच कराई जाए। साथ ही सभी जिलों में कंट्रोल रूम स्थापित कर नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों की नल-जल योजनाओं की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने जल शोधन संयंत्रों में ब्लीचिंग पाउडर एवं क्लोरीन का नियमित उपयोग सुनिश्चित करने, साथ ही कुओं एवं नलकूपों में क्लोरीन एवं ब्लीचिंग पाउडर का नियमित छिड़काव कराने के निर्देश भी दिए। कमिश्नर ने विशेष रूप से कहा कि पूर्व में जिन क्षेत्रों में उल्टी-दस्त, हैजा जैसी जलजनित बीमारियां फैली हैं, उन क्षेत्रों का चिन्हांकन कर बीमारी फैलने के कारणों एवं उनके निराकरण हेतु की गई कार्यवाही को सूचीबद्ध किया जाए।

इसके अतिरिक्त उन्होंने ऐसे संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों का भी चिन्हांकन करने को कहा, जहां नालों या नालियों को क्रॉस करती पाइपलाइन बिछी हुई है, अथवा जहां पुरानी पाइपलाइनों के कारण बार-बार टूट-फूट की शिकायतें आती हैं। इन सभी क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक सुधार कार्य किए जाने के निर्देश दिए गए।

कमिश्नर श्री सुचारी ने यह भी कहा कि शहरों, नगरों एवं गांवों में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर प्राप्त होने वाली शिकायतों, उनके निराकरण हेतु की गई कार्यवाही तथा जल की गुणवत्ता खराब होने के कारणों को सूचीबद्ध कर उन कारणों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। पेयजल योजनाओं की राइजिंग मेन एवं जल वितरण लाइनों में लगे क्षतिग्रस्त वॉल्व एवं वॉल्व चैंबर का सुधार कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से कराया जाए, ताकि पेयजल की गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

उन्होंने निर्देश दिए कि सतही जल स्रोतों पर आधारित योजनाओं के जल शोधन संयंत्रों में संचालित जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में जल की गुणवत्ता का परीक्षण प्रतिदिन नियमानुसार किया जाए तथा परीक्षण के परिणामों का विधिवत संधारण किया जाए। यदि परीक्षण में जल की गुणवत्ता प्रभावित पाई जाती है, तो तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही शोधित जल का क्रॉस परीक्षण लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की एनएबीएल मान्यता प्राप्त जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में कराए जाने के भी निर्देश दिए गए। क्रिटिकल क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शनों के जल में रेसिडुअल क्लोरीन की मात्रा का सघन परीक्षण कराने पर भी जोर दिया गया।

बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि पेयजल की गुणवत्ता के विभिन्न मापदंडों एवं जल में तत्वों की अधिकता से होने वाली बीमारियों की जानकारी के लिए नगरीय एवं ग्रामीण निकायों के संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों का प्रशिक्षण लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री, सहायक यंत्री एवं रसायनज्ञों के माध्यम से कराया जाए। जल शोधन संयंत्रों, उच्च स्तरीय टंकियों, सम्पवेल एवं नलकूप स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।

कमिश्नर श्री सुचारी ने आकस्मिक निरीक्षण करने, जल शोधन संयंत्रों में उपयोग होने वाले केमिकल्स की गुणवत्ता निर्धारित मापदंडों के अनुरूप रखने एवं उनकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। साथ ही उपभोक्ताओं में जागरूकता फैलाने पर जोर देते हुए कहा कि पाइपलाइन में लीकेज, वॉल्व या फिटिंग्स के क्षतिग्रस्त होने जैसी स्थितियों की जानकारी तुरंत संबंधित नगरीय या ग्रामीण निकाय को दी जाए। उपभोक्ताओं को घरेलू कनेक्शन के पाइप खुले न छोड़ने की समझाइश देने के निर्देश भी दिए गए।

इसके अलावा जिन नगरीय एवं ग्रामीण निकायों में सीवर लाइनें हैं, वहां उनके संधारण पर विशेष ध्यान देने को कहा गया ताकि सीवेज के कारण पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित न हो। बैठक में कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि पेयजल की शुद्धता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और सभी संबंधित अधिकारी जिम्मेदारी के साथ निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *