विधानसभा चुनाव हारने और मंत्री पद से बाहर होने के बावजूद कई पूर्व मंत्री, जनप्रतिनिधि और अधिकारी अब भी सरकारी बंगलों पर काबिज हैं। पात्रता समाप्त होने के बाद भी वर्षों से सरकारी आवासों में जमे ऐसे लोगों के खिलाफ अब मोहन यादव सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है। सरकार ने साफ कर दिया है कि बिना पात्रता के किसी भी व्यक्ति को सरकारी बंगले में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी और तय समय सीमा के बाद बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।
प्रभात झा के परिवार को अल्टीमेटम
बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्व. प्रभात झा के परिवार को भेजे गए नोटिस ने सरकार की सख्ती का साफ संकेत दे दिया है। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि यदि 13 जनवरी तक बंगला खाली नहीं किया गया, तो प्रशासन बल प्रयोग कर बेदखली की कार्रवाई करेगा। संपदा संचालनालय के अनुसार प्रभात झा के परिवार को 6 जनवरी को नोटिस जारी किया गया था।

पद नहीं, फिर भी बंगले पर कब्जा
2023 का विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद कई पूर्व मंत्री अब तक अपने सरकारी बंगलों में रह रहे हैं। इनमें पूर्व राजस्व मंत्री रामपाल सिंह, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और पूर्व सहकारिता मंत्री अरविंद भदौरिया शामिल हैं, जो करीब दो वर्षों से सरकारी आवास खाली नहीं कर रहे हैं।
इसी तरह पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया भी वर्तमान में विधायक न होने के बावजूद मंत्री रहते मिले बंगले में रह रही हैं। भोपाल की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर भी सांसद पद समाप्त होने के बाद भी सरकारी बंगले में काबिज हैं।
संपदा संचालनालय का कहना है कि रामपाल सिंह को भी पहले ही नोटिस दिया जा चुका है। सरकार ने दो टूक कहा है कि पात्रता खत्म होने के बाद किसी भी सूरत में सरकारी आवास पर कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मंत्रियों वाले बंगलों में रह रहे विधायक
राजधानी भोपाल में कई विधायक ऐसे भी हैं जो वर्तमान में विधायक होने के बावजूद मंत्री श्रेणी के बंगलों में रह रहे हैं। इनमें
- डॉ. प्रभुराम चौधरी (विधायक सांची)
- भूपेन्द्र सिंह (विधायक खुरई)
- गोपाल भार्गव (विधायक रहली)
- मीना सिंह (विधायक मानपुर)
शामिल हैं।

नहीं छोड़ा तो देना होगा भारी किराया
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि तय समय सीमा के बाद भी यदि बंगला खाली नहीं किया गया, तो भारी भरकम किराया वसूला जाएगा। नियमों के अनुसार पहले तीन महीने तक सामान्य किराया, अगले तीन महीने तक 10 गुना किराया और इसके बाद भी आवास नहीं छोड़ने पर 30 गुना तक किराया वसूला जा सकता है। इस तरह की वसूली को विधि विभाग की भी मंजूरी मिल चुकी है।
7 अफसरों को भी नोटिस
केवल नेता ही नहीं, बल्कि अधिकारी भी सरकार की कार्रवाई के दायरे में हैं। संपदा संचालनालय के अनुसार राजधानी में चार आईएएस अधिकारियों समेत कुल सात अधिकारियों को बंगला खाली करने के नोटिस जारी किए गए हैं। इनमें कुछ आईपीएस और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।
पात्रता से ऊपर की श्रेणी के बंगलों में विधायक
आमतौर पर मंत्रियों को बी और सी टाइप बंगले आवंटित किए जाते हैं, लेकिन वर्तमान में बीजेपी और कांग्रेस के आधा दर्जन से अधिक विधायक पात्रता से ऊंची श्रेणी के बंगलों में रह रहे हैं। इनमें अधिकांश वे नेता हैं जो पहले मंत्री रह चुके हैं।
इनमें प्रमुख नाम हैं—
- यादवेन्द्र सिंह, विधायक टीकमगढ़ (पूर्व मंत्री) – बी-23, 74 बंगले
- राजेश शुक्ला ‘बब्लू’, विधायक बिजावर – सी-20, शिवाजी नगर
- अजय सिंह, विधायक चुरहट (पूर्व नेता प्रतिपक्ष) – सी-19, शिवाजी नगर
- संजय पाठक, विधायक विजयराघवगढ़ (पूर्व मंत्री) – सी-26, शिवाजी नगर
- सुरेन्द्र पटवा, विधायक भोजपुर (पूर्व मंत्री) – बी-3, 74 बंगले
- अर्चना चिटनीस, विधायक बुरहानपुर (पूर्व मंत्री) – सी-28, शिवाजी नगर
- डॉ. विक्रांत भूरिया, विधायक झाबुआ – सी-1, 74 बंगले
- ओमप्रकाश सखलेचा, विधायक जावद (पूर्व मंत्री) – सी-16, शिवाजी नगर
“डेढ़ साल रहने दिया, इसके लिए धन्यवाद”
प्रभात झा के बेटे तुश्मुल झा ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि खरमास चल रहा है और इस दौरान ऐसी गतिविधियां नहीं की जातीं। उन्होंने कहा कि उनका परिवार इस बंगले में 20-21 साल रहा है और प्रभात झा को सांसद होने के नाते यहां रहने की पात्रता थी।
तुश्मुल झा ने कहा, “हम सरकार को धन्यवाद देते हैं कि डेढ़ वर्ष तक हमें यहां रहने दिया। सरकारी सुविधाओं का उपयोग तभी तक होना चाहिए, जब तक आप उस दायित्व पर रहते हैं—चाहे वह गाड़ी हो या घर।”
सख्ती का संदेश
मोहन सरकार की यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि अब ‘वीआईपी कल्चर’ और अपात्र कब्जों पर लगाम लगाने की तैयारी है। आने वाले दिनों में यदि तय समय सीमा के भीतर बंगले खाली नहीं हुए, तो राजधानी भोपाल में बड़े स्तर पर बेदखली की कार्रवाई देखने को मिल सकती है।