भोपाल में एक बार फिर गायों की मौत और गोमांस मिलने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। नगर निगम के अत्याधुनिक स्लॉटर हाउस से जुड़ी जिस गाड़ी से 26 टन मांस जब्त किया गया था, जांच में उसमें गोमांस की पुष्टि हो गई है। इस खुलासे के बाद राजनीति से लेकर प्रशासन तक हड़कंप मच गया है।
शुक्रवार को इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के माता मंदिर स्थित कार्यालय का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। कांग्रेसी हाथों में गायों के पोस्टर लेकर पहुंचे और सवाल उठाया कि जब प्रदेश और शहर में भाजपा की सरकार है, तो भोपाल में खुलेआम गोमांस कैसे बिक रहा है। उन्होंने ठेकेदार के घर पर बुलडोजर चलाने और पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

एक महीने पहले ही शुरू हुआ था 35 करोड़ का स्लॉटर हाउस
भोपाल के जिंसी इलाके में नगर निगम ने बड़े दावों के साथ करीब एक महीने पहले 35 करोड़ रुपए की लागत से बना आधुनिक स्लॉटर हाउस शुरू किया था। इसका संचालन ‘लाइव स्टॉक फूड प्रोसेसर प्राइवेट लिमिटेड’ को सौंपा गया था। इस कंपनी का संचालक असलम कुरैशी है, जिसे इस मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मामला सामने आने के बाद नगर निगम ने स्लॉटर हाउस को सील कर दिया, लेकिन अब तक यह तय नहीं हो सका है कि इस पूरे मामले की जिम्मेदारी किसकी है।
कांग्रेस का आक्रामक रुख
गोमांस मिलने के खुलासे के बाद कांग्रेस ने शुक्रवार को नगर निगम कार्यालय का घेराव किया। सुबह 11:30 बजे तक निगम कार्यालय में कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा। इस दौरान पुलिस बल तैनात रहा और हालात को संभालता रहा।
प्रदेश कांग्रेस महामंत्री अमित शर्मा ने कहा कि देश और प्रदेश दोनों जगह भाजपा की सरकार है, इसके बावजूद गोमांस की तस्करी हो रही है और उसे विदेश तक भेजा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाए कि—
- गोमांस कैसे बिक रहा है?
- स्लॉटर हाउस से मांस से भरी गाड़ी बाहर कैसे निकली?
- ठेकेदार को टेंडर किसने दिलाया?
- किस नेता और अधिकारी को पैसा पहुंचाया जाता था?
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ठेकेदार के घर और स्लॉटर हाउस पर बुलडोजर की कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस खुद बुलडोजर लेकर प्रदर्शन करेगी और मुख्यमंत्री व महापौर निवास का भी घेराव करेगी। कांग्रेस ने साफ कहा कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

हिंदू संगठनों का भी प्रदर्शन
इससे एक दिन पहले, गुरुवार को हिंदूवादी संगठनों ने भी इस मुद्दे को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया था। उन्होंने गोवंश हत्या और गोमांस तस्करी को लेकर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
जिम्मेदारों के तर्क सवालों के घेरे में
नगर निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने रिपोर्ट के आधार पर स्लॉटर हाउस को सील करने की बात कही है। वहीं अपर आयुक्त एवं गोवर्धन परियोजना वेटनरी शाखा प्रभारी हर्षित तिवारी ने शवों के डिस्पोजल और मांस को स्लॉटर हाउस से बाहर ले जाने के सवाल पर केवल इतना कहा कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत होती है और इसके लिए एसडीएम के आदेश होते हैं।
हालांकि, निरीक्षण, रिकॉर्ड संधारण और निगरानी की जिम्मेदारी वेटनरी शाखा की ही होती है। स्लॉटर हाउस का ठेका मेयर इन काउंसिल (MIC) से स्वीकृत हुआ है, ऐसे में महापौर मालती राय की भूमिका और जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

तीन साल पहले भी उठा था विवाद
यह पहला मौका नहीं है जब असलम कुरैशी का नाम विवादों में आया हो। करीब तीन साल पहले भी भोपाल के पास जीवदया गोशाला के समीप बड़ी संख्या में मृत गोवंश फेंके जाने का मामला सामने आया था। जांच में पता चला था कि नगर निगम के ठेकेदार ने गोशाला से करीब एक किलोमीटर दूर मृत गोवंश के शव फेंके थे, जिससे वहां कंकालों का ढेर लग गया था और इलाका कब्रगाह जैसा नजर आने लगा था। उस समय भी ठेकेदार असलम कुरैशी ही था।
कुरैशी पिछले करीब 30 वर्षों से शहर में मृत पशुओं के शव उठाने का काम करता रहा है। पशुओं से निकलने वाला चमड़ा और हड्डियां फैक्ट्रियों में भेजी जाती थीं। इसी ठेकेदार को नगर निगम ने स्लॉटर हाउस का संचालन भी सौंप दिया था, जिसे एमआईसी से बाकायदा मंजूरी दी गई थी।
मध्यप्रदेश में गोशालाओं की स्थिति
मध्यप्रदेश में सरकारी और निजी मिलाकर 1700 से अधिक गोशालाएं संचालित हैं, जिनमें करीब तीन लाख गोवंश संरक्षित हैं। सरकार की ओर से गोशालाओं को हर साल अनुदान भी दिया जाता है। इसके बावजूद राजधानी भोपाल में गोमांस मिलने की घटना ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल स्लॉटर हाउस सील है, ठेकेदार जेल में है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने बड़े पैमाने पर गोमांस का कारोबार आखिर किसकी शह पर चल रहा था और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कब कार्रवाई होगी।