इंदौर जिला न्यायालय परिसर में गुरुवार को एक व्यक्ति के साथ मारपीट और धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। घटना को लेकर पुलिस ने एक वकील सहित दो लोगों के खिलाफ मारपीट, धमकी और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। वहीं, इस मामले में वकीलों की ओर से भी पीड़ित बताए जा रहे दीपक पाटीदार के खिलाफ शिकायत की गई है। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर पूरे मामले की जांच कर रही है।
कैंसिल चेक के बहाने बुलाया कोर्ट
पुलिस के अनुसार पीड़ित दीपक पाटीदार, निवासी पिगडंबर की शिकायत पर हिमांशु गोहर, निवासी रणजीत हनुमान मंदिर के पीछे और उसके साथी विकास के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दीपक निजी नौकरी करता है और आरोपी हिमांशु गोहर उसका वकील है।
गुरुवार को हिमांशु गोहर ने दीपक को फोन कर कैंसिल चेक देने के बहाने जिला न्यायालय परिसर बुलाया था। जब दीपक कोर्ट पहुंचा तो वहां हिमांशु के साथ उसके कुछ अन्य साथी भी मौजूद थे। इसी दौरान कोर्ट फीस और पुराने भुगतान को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया।

फीस को लेकर विवाद, हाथापाई में बदला मामला
बताया जा रहा है कि दीपक ने कोर्ट फीस को लेकर आपत्ति जताई और पहले दिए गए पैसों का हिसाब मांगा। इस पर विवाद बढ़ गया और आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। दीपक का आरोप है कि इसी दौरान हिमांशु के एक अन्य साथी वकील ने उसका मोबाइल फोन भी तोड़ दिया और उसे जान से मारने की धमकी दी।
कोर्ट परिसर से भागकर बचाई जान
दीपक पाटीदार ने पुलिस को बताया कि उसका एक पारिवारिक विवाद न्यायालय में विचाराधीन है। करीब डेढ़ साल पहले उसने इस केस की पैरवी के लिए वकील हिमांशु गोहर को लगभग 1 लाख 50 हजार रुपए दिए थे। अब केस की प्रगति से असंतुष्ट होकर वह पैसे वापस मांग रहा था, जिसको लेकर कोर्ट परिसर में विवाद हुआ।
मारपीट के दौरान दीपक ने किसी तरह कोर्ट परिसर से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। बाहर निकलने के बाद उसने राहगीरों की मदद से अपने परिजनों को घटना की जानकारी दी और बाद में थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
दोनों पक्षों की शिकायत, जांच जारी
इस मामले में वकीलों की ओर से भी दीपक पाटीदार के खिलाफ शिकायत दी गई है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
घटना के बाद जिला न्यायालय परिसर की सुरक्षा और वहां आम लोगों के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।