सागर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग सागर ने फसल नुकसान की बीमा राशि के मामले में शनिवार को अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने सेवा में कमी मानते हुए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के प्रोप्राइटर एवं संचालक पर जुर्माना लगाया है। साथ ही आदेश दिया है कि परिवादी को फसल बीमा की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दो माह के भीतर भुगतान की जाए।
मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के अध्यक्ष राजेश कुमार कोष्टा एवं सदस्य अनुभा वर्मा की पीठ ने की।
क्या है पूरा मामला
परिवादी के अधिवक्ता पवन नन्होरिया ने बताया कि फरियादी प्रदीप गुरु, निवासी जवाहर वार्ड देवरी, ने एचडीएफसी इरगो एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी सहित संबंधित कॉमन सर्विस सेंटर संचालकों के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में परिवाद प्रस्तुत किया था। परिवाद में भोपाल स्थित एचडीएफसी इरगो एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी के प्रबंधक, देवरी क्षेत्र के कॉमन सर्विस सेंटर प्रोप्राइटर शुभम राजपूत एवं सीएससी संचालक रज्जू कुर्मी को विपक्षी बनाया गया था।

परिवाद में बताया गया कि प्रदीप गुरु ने त्रिवेणी बाई मिश्रा, निवासी सागर, की ग्राम रामखेड़ी स्थित लगभग 20 एकड़ कृषि भूमि (खसरा नंबर 12, 13, 48 एवं 49, कुल रकबा 7.99 हेक्टेयर) ठेके पर ली थी। वर्ष 2017 में इस भूमि पर सोयाबीन की फसल बोई गई थी।
प्रीमियम कटा, लेकिन क्लेम नहीं मिला
फरियादी ने 12 अगस्त 2017 को फसल बीमा के तहत 4120.40 रुपए की प्रीमियम राशि जमा की थी, जिसकी रसीद भी उपलब्ध है। वर्ष 2017 में सोयाबीन की फसल पीला मोजेक वायरस से पूरी तरह खराब हो गई। इसकी शिकायत आवेदक द्वारा बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर की गई, लेकिन इसके बावजूद उसे बीमा क्लेम की राशि नहीं दी गई।
परिवादी ने यह भी बताया कि उसी क्षेत्र के अन्य किसानों को फसल बीमा का लाभ मिल गया, लेकिन उसे लगातार नजरअंदाज किया गया। निराश होकर उसने 13 दिसंबर 2018 को रजिस्टर्ड नोटिस भी भेजा, जिसका कोई जवाब नहीं दिया गया।
उपभोक्ता फोरम का निर्णय
मामले की सुनवाई के बाद उपभोक्ता फोरम ने माना कि फसल बीमा क्लेम का भुगतान न करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। आयोग ने आदेश दिया कि फसल नुकसान की क्षतिपूर्ति राशि 1,77,383 रुपए परिवाद प्रस्तुति की तिथि 1 फरवरी 2019 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा की जाए।
इसके अलावा आयोग ने सेवा में कमी के लिए 10 हजार रुपए क्षतिपूर्ति एवं 2 हजार रुपए वाद व्यय देने का भी आदेश दिया है। यह संपूर्ण राशि विपक्षी क्रमांक-3, कॉमन सर्विस सेंटर के संचालक रज्जू कुर्मी द्वारा दो माह के भीतर परिवादी को भुगतान की जाएगी।
किसानों के लिए अहम फैसला
उपभोक्ता आयोग के इस फैसले को किसानों के हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि यदि फसल बीमा के मामलों में लापरवाही या सेवा में कमी बरती जाती है, तो संबंधित एजेंसी या संचालक को इसकी जवाबदेही तय की जाएगी। इससे भविष्य में किसानों को समय पर बीमा लाभ मिलने की उम्मीद भी मजबूत हुई है।