बंडा सिविल अस्पताल में शुरू हुई सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा !

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पहला सफल ऑपरेशन, मां और नवजात दोनों स्वस्थ

सागर। सागर जिले के बंडा स्थित सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सिजेरियन डिलीवरी (जटिल प्रसव) की सुविधा का शुभारंभ कर दिया गया है। इस सुविधा के शुरू होते ही अस्पताल में पहला सफल सिजेरियन प्रसव कराया गया, जिससे क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को बड़ी राहत मिली है।

सिजेरियन सुविधा शुरू होने के बाद बंडा, शाहगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों की लगभग 4 लाख से अधिक जनसंख्या को इसका सीधा लाभ मिलेगा। अब जटिल प्रसव की स्थिति में महिलाओं को सागर या अन्य बड़े अस्पतालों की ओर रेफर नहीं किया जाएगा।

वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी

दरअसल, बंडा क्षेत्र की जनता और जनप्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से सिविल अस्पताल में सिजेरियन प्रसव सुविधा शुरू करने की मांग की जा रही थी। मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत अब इस मांग को पूरा करते हुए सिविल अस्पताल बंडा में जटिल प्रसव की सुविधा शुरू की गई है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. ममता तिमोरी ने बताया कि अब तक बंडा में सिजेरियन सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता था। जटिल मामलों में प्रसूताओं को दूर के अस्पतालों में भेजना पड़ता था, जिससे समय और जोखिम दोनों बढ़ जाते थे। इस समस्या को देखते हुए शासन स्तर पर लगातार मांग रखी जा रही थी, जो अब पूरी हुई है।

पहला सफल सिजेरियन प्रसव

सुविधा शुरू होने के बाद पापेट निवासी 23 वर्षीय रजनी लोधी का सिविल अस्पताल बंडा में पहला सफल सिजेरियन प्रसव कराया गया। प्रसूता ने 3 किलोग्राम वजनी स्वस्थ बालक को जन्म दिया। प्रसव के बाद मां और नवजात दोनों पूर्णतः स्वस्थ हैं और चिकित्सकीय निगरानी में हैं।

विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने किया ऑपरेशन

यह सिजेरियन प्रसव क्षेत्रीय संचालक डॉ. नीना गिडियन एवं जिले से आई स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ललिता पाटिल की निगरानी में संपन्न हुआ। ऑपरेशन टीम में

  • डॉ. प्रदीप सरवरिया (गायनेकोलॉजिस्ट)
  • डॉ. अशुल नेमा (एनेस्थेटिक)
  • डॉ. हिमांशु वर्मा (पीडियाट्रिशियन)
    सहित सिविल अस्पताल बंडा का ओटी स्टाफ मौजूद रहा।

क्षेत्र की महिलाओं को बड़ी राहत

सिविल अस्पताल बंडा में सिजेरियन सुविधा शुरू होने से क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को समय पर सुरक्षित इलाज मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।

स्वास्थ्य विभाग ने इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि आगे भी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा।

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