पन्ना।
मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में खाद की भारी किल्लत से परेशान किसानों का सब्र सोमवार को जवाब दे गया। देवेंद्र नगर क्षेत्र के हजारों किसान अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए और पन्ना–सतना मार्ग पर स्थित नेशनल हाईवे-39 पर चक्काजाम कर दिया। किसानों के उग्र प्रदर्शन के चलते हाईवे पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया और हालात तनावपूर्ण हो गए।
सुबह से ही सड़क पर उतरे किसान
सुबह होते ही आक्रोशित किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ हाईवे पर पहुंच गए और उन्हें सड़क के बीचों-बीच खड़ा कर दिया। देखते ही देखते नेशनल हाईवे-39 जाम हो गया। किसानों का कहना था कि रबी और खरीफ की फसलों के लिए खाद की अत्यंत आवश्यकता है, लेकिन सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के यहां खाद उपलब्ध नहीं है। कई दिनों से किसान खाद के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
खाद को लेकर ‘महाभारत’ जैसे हालात
खाद की किल्लत को लेकर किसानों का आक्रोश इतना बढ़ गया कि मौके पर माहौल रणक्षेत्र जैसा बन गया। प्रदर्शन के दौरान सरकार विरोधी नारे गूंजते रहे। किसानों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि समय रहते खाद की व्यवस्था नहीं की गई, जिसका खामियाजा अन्नदाता को भुगतना पड़ रहा है।

पुलिस से हुई झड़प, हालात हुए बेकाबू
सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन बात नहीं बनी और प्रदर्शनकारियों व पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक के बाद झूमाझटकी भी हो गई। इस दौरान कुछ समय के लिए स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। पुलिस ने हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल बुलाया।
दोनों ओर दो किलोमीटर लंबा जाम
चक्काजाम के कारण नेशनल हाईवे के दोनों ओर करीब दो किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। भीषण गर्मी में फंसे राहगीरों, महिलाओं और बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। एंबुलेंस और आवश्यक सेवाओं के वाहनों को भी निकलने में दिक्कतें आईं।
किसानों की चेतावनी
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही खाद की आपूर्ति सुचारु नहीं की गई, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा। किसानों ने मांग की कि देवेंद्र नगर सहित पूरे पन्ना जिले में तत्काल पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए, ताकि खेती का कार्य समय पर हो सके।
प्रशासनिक आश्वासन के बाद स्थिति नियंत्रित
काफी देर बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने किसानों से बातचीत कर जल्द खाद उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई। हालांकि किसान अब भी प्रशासन की कार्यप्रणाली से नाराज नजर आए।
यह घटना एक बार फिर किसानों की समस्याओं और खाद वितरण व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है, जिससे समय रहते समाधान न होने पर हालात और बिगड़ सकते हैं।