बांधवगढ़/जबलपुर। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की लगातार हो रही मौतों के बीच उप संचालक प्रमोद कुमार वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन का मामला सामने आया है। वन बल प्रमुख को 15 जनवरी को ईमेल के माध्यम से भेजी गई शिकायत में वर्मा पर विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये का दुरुपयोग करने और इसे निजी हितों के लिए बांटने का आरोप लगाया गया है।
जांच के लिए दस्तावेज तलब
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं संचालक राज्य वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर प्रदीप वासुदेव ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए 20 जनवरी को पूरे मामले की जांच के लिए क्षेत्र संचालक टाइगर रिजर्व बांधवगढ़ को दस्तावेजों के साथ तलब किया है।

शिकायत में लगाए गए मुख्य आरोप
शिकायतकर्ता और एक्टिविस्ट सुशील लेवी का दावा है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में विकास कार्यों के लिए 16 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था, जिसमें से 4-5 करोड़ रुपए का खर्च पहले ही किया जा चुका है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं की गईं, कई कार्य बिना उचित स्वीकृति के करवाए गए और निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया।

साथ ही आरोप लगाया गया है कि एनएच इंडस्ट्रीज के संचालक नीरज तिवारी की फर्म के नाम पर फर्जी बिल पास कर सरकारी राशि का गबन किया गया। तिवारी के नाम पर रजिस्टर्ड बोलेरो वाहन (एमपी 04 जेडएस 3140) का हर माह किराया 25,000 रुपए और डीजल खर्च भी 25,000 रुपए दिखाया जा रहा है, जबकि यह निजी वाहन गैर टैक्सी कोटे का है और इसे सरकारी कार्यों के लिए अनुबंधित नहीं किया गया था। इसके अलावा महालक्ष्मी ट्रेडर्स के नाम से भी कई फर्जी बिल बनाए जाने का आरोप है।

अनियमितताओं के व्यापक दायरे की आशंका
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि पहले शिवपुरी जिले में कार्यरत एनएच इंडस्ट्रीज फर्म ने कूनो नेशनल पार्क में भी डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश वर्मा के समय में इसी प्रकार की अनियमितताएं की थीं। शिकायतकर्ता ने कहा कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सरकारी धन का दुरुपयोग और निजी हितों के लिए राशि का गबन गंभीर मामला है और इसके लिए शीघ्र कार्रवाई होनी चाहिए।
वन विभाग की प्रतिक्रिया
प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं और संबंधित दस्तावेजों के साथ क्षेत्रीय अधिकारियों को तलब किया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और वित्तीय गड़बड़ी की पूरी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
इस मामले से न सिर्फ टाइगर रिजर्व में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि बाघ संरक्षण और विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी गहरी छाया पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।