सागर में IMA मैराथन में अव्यवस्था पर हंगामा, मेडल न मिलने से खिलाड़ियों ने किया चक्काजाम !

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सागर में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की देखरेख में रविवार को आयोजित मैराथन उस समय विवादों में घिर गई, जब विजेता खिलाड़ियों को मेडल और पुरस्कार नहीं दिए गए। इससे नाराज खिलाड़ियों ने खेल परिसर के सामने सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। हालात इतने बिगड़ गए कि एक खिलाड़ी खेल परिसर के मुख्य गेट पर चढ़ गया और मेडल दिलाने की मांग करने लगा।

दरअसल, रविवार सुबह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा खेल परिसर, सागर से मैराथन का आयोजन किया गया था। इसमें 10 किलोमीटर, 5 किलोमीटर और 3 किलोमीटर की दौड़ शामिल थी। आयोजकों की ओर से यह घोषणा की गई थी कि प्रत्येक श्रेणी में पहले 50-50 विजेताओं को मेडल और पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। इसी आश्वासन पर शहर, जिले और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने मैराथन में भाग लिया।

मैराथन खेल परिसर से शुरू होकर बस स्टैंड, डिग्री कॉलेज, जैन स्कूल, मेडिकल कॉलेज रोड, पॉलिटेक्निक कॉलेज, मनोरमा कॉलोनी चौराहा होते हुए वापस खेल परिसर में समाप्त हुई। दौड़ समाप्त होने के बाद कुछ प्रतिभागियों को औपचारिक रूप से मेडल दिए गए, लेकिन अधिकांश विजेता खिलाड़ियों को बिना सम्मानित किए ही आयोजक वहां से चले गए।

मेडल और पुरस्कार नहीं मिलने से खिलाड़ी भड़क गए। उन्होंने आयोजकों से मेडल देने की मांग की, लेकिन जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो खिलाड़ियों ने विरोध शुरू कर दिया। आक्रोशित खिलाड़ियों ने खेल परिसर के सामने बस स्टैंड–सिविल लाइन मार्ग पर बैठकर चक्काजाम कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात बाधित हो गया।

विरोध के दौरान एक खिलाड़ी खेल परिसर के गेट पर चढ़ गया और जोर-जोर से मेडल दिलाने की मांग करने लगा। हंगामे और चक्काजाम की सूचना मिलते ही गोपालगंज थाना और सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने खिलाड़ियों को समझाइश दी और स्थिति को नियंत्रण में लिया। इसके बाद आयोजकों से संपर्क कर विजेता खिलाड़ियों को मेडल दिलवाए गए, तब जाकर मामला शांत हुआ और चक्काजाम समाप्त कराया गया।

खिलाड़ियों ने आरोप लगाया कि आईएमए द्वारा बड़े आयोजन का दावा किया गया था, लेकिन व्यवस्थाओं के नाम पर कुछ भी नहीं था। न समय पर जानकारी दी गई और न ही पुरस्कार वितरण की उचित व्यवस्था की गई। खिलाड़ियों का कहना था कि आयोजकों ने मेडल और प्राइज मनी देने की घोषणा की थी, लेकिन अंत में किसी को कुछ नहीं दिया गया, जिससे मजबूर होकर उन्हें विरोध करना पड़ा।

मामले को लेकर जब इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इस घटना के बाद आयोजन की व्यवस्थाओं और जिम्मेदारी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

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