अस्पताल से घर लौटे डॉ. गुरनाम सिंह, मनी सिंह करेंगे संकल्प पूर्ति, करेंगे लंगर और खीर वितरण !

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सागर: रिश्तों की असली महत्ता को अक्सर लोग तब समझते हैं, जब कठिनाइयां सामने आती हैं। कुछ रिश्ते स्वार्थी हो सकते हैं, लेकिन माता-पिता और संतान का रिश्ता हमेशा सबसे खास और निस्वार्थ होता है। इसी का उदाहरण हाल ही में डॉक्टर गुरनाम सिंह और उनके पुत्र मनी सिंह गुरोन के बीच देखने को मिला।

पिता की तबियत बिगड़ी, बेटे ने दिखाई भावनाओं की गहराई

बीते दिनों डॉ. गुरनाम सिंह को हार्ट अटैक आया था और उनकी स्थिति गंभीर बताई गई थी। आनन-फानन में उन्हें मकरोनिया के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां करीब 24 घंटे तक उनकी हालत बेहद नाजुक रही। इस दौरान मनी सिंह, जो सुबह ही हाई कोर्ट जबलपुर में जरूरी कार्य के लिए जा रहे थे, को दमोह के पास फोन पर पिता की हालत की जानकारी मिली।

इसके बाद उन्होंने तुरंत सागर की ओर अपनी गाड़ी मोड़ी और अस्पताल पहुंचे। मनी सिंह ने डॉक्टरों से पिता की स्थिति की जानकारी ली और करीब 72 घंटे तक उनके साथ समय बिताया, जिससे पिता की तबियत में सुधार हुआ। शनिवार को डॉ. गुरनाम सिंह को घर ले जाया गया और अब उनकी स्वास्थ्य स्थिति सामान्य है।

संकल्प अनुसार करेंगे सेवा

मनी सिंह ने अपने पिता की स्वास्थ्य सुधार को लेकर संकल्प लिया है। मंगलवार को वह कठवा पुल सरकार, पहलवान बाबा मंदिर में खीर प्रसादी का वितरण करेंगे। इसके अलावा, पंजाब के प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्री फतेहगढ़ साहेब, सरहिंद में लंगर सेवा के लिए 11,000 रुपये की राशि दान करेंगे।

पिता-पुत्र का रिश्ता: दिखावे से परे

मनी सिंह अपनी निजी जिंदगी को आम लोगों से छिपाए रखते हैं। अक्सर लोग उन्हें जिद्दी या सनकी समझ सकते हैं, लेकिन उनके करीबी जानते हैं कि उनके अंदर एक बच्चे जैसी भावनाएं और दरियादिली भरी हुई हैं। पिता के प्रति उनका यह असीम स्नेह और सेवा का भाव यह दिखाता है कि सच्चे रिश्ते दिखावे के लिए नहीं, बल्कि प्रेम और कर्तव्य के लिए होते हैं।

निष्कर्ष

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