विवादों में घिरा अफ्रीका कप ऑफ नेशंस 2025 का फाइनल, सेनेगल ने एक्स्ट्रा टाइम में मोरक्को को हराकर जीता खिताब !

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रेफरी के फैसले के बाद सेनेगल के खिलाड़ी काफी गुस्से में नजर आए और खेल रोक दिया गया। देखते ही देखते मैदान पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और करीब 14 मिनट तक मुकाबला रुका रहा। दर्शकों में भी असमंजस की स्थिति बनी रही। बाद में सेनेगल के कप्तान सादियो माने ने अपने खिलाड़ियों को समझाया, जिसके बाद टीम दोबारा मैदान पर लौटी और मैच को आगे बढ़ाया गया।

मैच दोबारा शुरू होने के बाद मोरक्को को मिली पेनल्टी पर ब्राहिम डियाज गोल करने में असफल रहे। सेनेगल के गोलकीपर ने शानदार बचाव करते हुए अपनी टीम को राहत दिलाई। निर्धारित समय तक कोई गोल नहीं हो सका और मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में पहुंच गया।

एक्स्ट्रा टाइम के 94वें मिनट में सेनेगल के पाप गुए ने निर्णायक गोल दागकर इतिहास रच दिया। उनके इस गोल की बदौलत सेनेगल ने मोरक्को को 1-0 से हराकर अफ्रीका कप ऑफ नेशंस 2025 का खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ सेनेगल ने दूसरी बार अफ्रीका कप ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।

हालांकि जीत से ज्यादा यह फाइनल मुकाबला विवादों के कारण चर्चा में रहा। सोशल मीडिया पर फैंस और फुटबॉल विशेषज्ञ इसे अफ्रीका कप के इतिहास के सबसे विवादित फाइनल मुकाबलों में से एक बता रहे हैं। रेफरी के फैसलों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि अफ्रीका कप ऑफ नेशंस के इतिहास में विवाद कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बड़े मुकाबले विवादों में घिर चुके हैं।
वर्ष 2010 के अफ्रीका कप में टोगो टीम की बस पर हुए आतंकी हमले के बाद टूर्नामेंट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे।
2015 के अफ्रीका कप में मेजबान इक्वेटोरियल गिनी पर रेफरी फैसलों को प्रभावित करने के आरोप लगे थे, जिससे घाना की टीम और अधिकारी खुले तौर पर नाराज नजर आए थे।
वहीं 2022 के अफ्रीका कप में ट्यूनीशिया और माली के बीच मैच में रेफरी द्वारा समय से पहले मुकाबला समाप्त कर दिए जाने पर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था, जिसके बाद अफ्रीकन फुटबॉल कॉन्फेडरेशन (CAF) को आधिकारिक सफाई देनी पड़ी थी।

अफ्रीका कप ऑफ नेशंस 2025 का यह फाइनल मुकाबला भी इसी विवादित इतिहास में एक और अध्याय जोड़ता नजर आया, जहां खेल भावना से ज्यादा रेफरी के फैसले और हंगामे चर्चा का विषय बन गए।

अफ्रीका कप ऑफ नेशंस 2025 का फाइनल मुकाबला फुटबॉल से ज्यादा विवाद और हंगामे के कारण सुर्खियों में रहा। रविवार को मोरक्को और सेनेगल के बीच मोरक्को के प्रिंस मौले अब्देल्लाह स्टेडियम में खेले गए खिताबी मुकाबले में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब मैच के अंतिम समय में रेफरी द्वारा मोरक्को के पक्ष में एक पेनल्टी दी गई। इस फैसले से नाराज होकर सेनेगल की पूरी टीम मैदान छोड़कर बाहर चली गई।

रेफरी के फैसले के बाद सेनेगल के खिलाड़ी काफी गुस्से में नजर आए और खेल रोक दिया गया। देखते ही देखते मैदान पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और करीब 14 मिनट तक मुकाबला रुका रहा। दर्शकों में भी असमंजस की स्थिति बनी रही। बाद में सेनेगल के कप्तान सादियो माने ने अपने खिलाड़ियों को समझाया, जिसके बाद टीम दोबारा मैदान पर लौटी और मैच को आगे बढ़ाया गया।

मैच दोबारा शुरू होने के बाद मोरक्को को मिली पेनल्टी पर ब्राहिम डियाज गोल करने में असफल रहे। सेनेगल के गोलकीपर ने शानदार बचाव करते हुए अपनी टीम को राहत दिलाई। निर्धारित समय तक कोई गोल नहीं हो सका और मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में पहुंच गया।

एक्स्ट्रा टाइम के 94वें मिनट में सेनेगल के पाप गुए ने निर्णायक गोल दागकर इतिहास रच दिया। उनके इस गोल की बदौलत सेनेगल ने मोरक्को को 1-0 से हराकर अफ्रीका कप ऑफ नेशंस 2025 का खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ सेनेगल ने दूसरी बार अफ्रीका कप ट्रॉफी पर कब्जा जमाया।

हालांकि जीत से ज्यादा यह फाइनल मुकाबला विवादों के कारण चर्चा में रहा। सोशल मीडिया पर फैंस और फुटबॉल विशेषज्ञ इसे अफ्रीका कप के इतिहास के सबसे विवादित फाइनल मुकाबलों में से एक बता रहे हैं। रेफरी के फैसलों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि अफ्रीका कप ऑफ नेशंस के इतिहास में विवाद कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई बड़े मुकाबले विवादों में घिर चुके हैं।
वर्ष 2010 के अफ्रीका कप में टोगो टीम की बस पर हुए आतंकी हमले के बाद टूर्नामेंट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे।
2015 के अफ्रीका कप में मेजबान इक्वेटोरियल गिनी पर रेफरी फैसलों को प्रभावित करने के आरोप लगे थे, जिससे घाना की टीम और अधिकारी खुले तौर पर नाराज नजर आए थे।
वहीं 2022 के अफ्रीका कप में ट्यूनीशिया और माली के बीच मैच में रेफरी द्वारा समय से पहले मुकाबला समाप्त कर दिए जाने पर बड़ा विवाद खड़ा हुआ था, जिसके बाद अफ्रीकन फुटबॉल कॉन्फेडरेशन (CAF) को आधिकारिक सफाई देनी पड़ी थी।

अफ्रीका कप ऑफ नेशंस 2025 का यह फाइनल मुकाबला भी इसी विवादित इतिहास में एक और अध्याय जोड़ता नजर आया, जहां खेल भावना से ज्यादा रेफरी के फैसले और हंगामे चर्चा का विषय बन गए।

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